Darinde Se Mohabbat- 6

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“पब्लिक पर नहीं? दुश्मन पर, वह लोग पब्लिक के दुश्मन थे हम ने उन्न दुश्मनों को मारा! और मारना ही चाहिए था… जान तो नहीं लिए उनके… उन्नको अच्छाह सबक मिल गया होगा और जिंदगी में कभी भी दोबारा वैसा नहीं करेंगे! हाँ हम सब ने ट्रेनिंग की भड़ास निकाले सही है, बॉस ने भी सही कहा था….. मगर मैं एक बात बताऊं तुम सब को? मुझे कोई चैन या सुकून नहीं मिला….. मैं और 10/20 इसे लोगों को मारना चाहता हूँ तब चैन मिलेगा मुझको!!” विकास सच में बहुत पठार दिल होने लगा था अब…. सब कड़क ट्रेनिंग का नतीजा था….. एक तो बिलकुल खामोश बंद रहते हे सब, दुनिया से अलग, ना किसी से बात ना किसी से मिलन, घरवालों से दूर, अपनों से अलग, इंसान से जैसे शैतान बने जा रहे थे सब के सब!! दिल में किसी के लिए कोई दर्द ना एहसास होता था, बस गुस्सा और तनाव से भरे रहते थे हर लम्हें सबके…… कभी कभी विकास सोचता था के इस से बेहतर तो मैं खेती बड़ी करता, चैन ओ सुकून तो मिलता, अपनों के बीच तो रहता, दोस्तों के दरमियान तो होता…. यह कहाँ आ गया हूँ और किया बन रहा हूँ? इंसान ही हूँ या हेवान बन रहा हूँ? किया करूँ? निकल जाऊं याहान से? या और आगे बढ़ुन?

एक साल और भी कठिन ट्रेनिंग से गुजरने के बाद उन्न 12 कोमांडोस को पर्मनेंट्ली आस कोमांडोस अपायंट किया गया. वैसे 18 थे मगर सिर्फ़ 12 कोमांडोस बनने, बाकी को आस गार्ड्स रखा गया उसी यूनिट में. विकास 23 साल का हो गया था 24 में में कदम रख चुका था. हफ्ते में 5 रोज़ यूनिट में जाना था नौकरी करने के तोर पर. करना किया होता था, कुछ खास नहीं हर रोज़ परदे और एक्सर्साइज़स करना जरूरी था मगर कठिन नहीं, बॉडी को फिट रखने के लिए सभी बेसिक एक्सर्साइज़स करना था और हफ्ते में 2 दिन दौड़ना पड़ता था कभी 10 तो कभी 20 किलोमीटर्स, यह पार्ट ऑफ थे ड्रिल था. और हफ्ते में दो दिन फाइरिंग एक्सर्साइज़स भी होते थे. हाँ विकास शार्प शूटर बन गया था उन्न कठिन ट्रेनिंग के दौरान ही. अब शूटिंग को मेंटेन रखने के लिए शूटिंग ट्रेनिंग होते थे 2 दिन हर हफ्ते में.

वीकेंड में फ्री होता था मगर, कभी एमर्जेन्सी हुई तो वीकेंड में कॉल करने से तुरंत रिपोर्ट करना था यूनिट पर. यूनिट में अफ़ज़ल उसका बेस्ट फ़्रेंड था. तो वीकेंड्स में कभी वो अफ़ज़ल के यहाँ तो कभी अफ़ज़ल विकास के यहाँ पाए जाते थे.

वीकेंड्स में दोनों खूब रिलॅक्स्ड दिखते थे किसी को पता नहीं था के यह कोमांडोस थे. बिलकुल नॉर्मल लोगों की तरह पेश आते थे दोनों. अपने मुहल्ले के बाकी दोस्तों के बीच विकास वैसे मिलता था जैसे पहले मिला करते थे मगर कम. ज्यादा तार अपने घर के अंदर ही रहने लगा था विकास. बाकी के सब 12 कोमांडोस का भी वही हाल था. जैसे यूनिट से घर वापस जाते तो घर में कदम रखने के बाद किसी को बाहर निकालने का मन नहीं करता था. बहुत थकान महसूस होती थी. 3 साल की ट्रेनिंग की थकान और घुटन उन्न सब के अंदर जैसे कैद थे. किसी से इस बारे में वह बात नहीं करते थे मगर सभी के अंदर कुछ दबे हुए थे जैसे एक ज्वालामुखी जो कभी भी फॅट सकती है. वह अपने यूनिट के दोस्तों के बीच भी अपने अंदर की घुटन, तकलीफ को बयान नहीं करते थे.

घर में आंटी बाप और भाई बहन से जैसे दूरी पैदा कर लिए थे सब ने. बातें कम करते थे और अपने आप में गुम रहते थे. जब पहला दिन विकास घर वापस आया 3 साल के बाद तो अपनी आंटी की बाहों में देर तक रोता रहा एक छोटे बच्चे की तरह. आंटी पूंछ पूंछ कर तक गयी के “बेटा किया बात है बता तो सही, क्यों रो रहा है? किया हुआ? खुशी के एनसू हे या कोई तकलीफ है? या हम को 3 साल बाद मिले इस लिए रोना आया बोल ना बेटा?” आंटी भी रो रही थी अपने जवान बेटे को रोते हुए देख कर, और भाई बहनों का बुरा हाल था बारे भाई को रोते देख कर. बाप को कुछ कुछ समझ में आ रही था मगर अपने सीने पर उसे ने पठार रख लिया था क्योंकि उसको थोड़ा बहुत खबर था के कठिन ट्रेनिंग से वापस आया और अब वो विकास नहीं रहा जो घर से गया था 3 साल पहले! और धीरे धीरे सब को समझ में आ गया के विकास अब एक अलग इंसान बन गया है. कोई कहता के यह मेचुरिटी की निशानी था तो कोई सोचता के शायद उसको किसी से प्यार है और वो बता नहीं सकता. उसकी आंटी और बहन ने कई बार पूछा भी के अगर किसी लड़की से प्यार करता है तो बता दे वह उनके शादी करवा देंगे मगर विकास जवाब देता के वो अभी शादी के लिए तैयार नहीं है.

कुछ ऐसा ही हाल बाकी के 11 साथियों का भी था, उन्न के घरवाले भी इसे ही दौड़ से गुजर रहे थे. विकास के बाप ने अपनी पत्नी से बात की, के विकास के लिए एक लड़की देखना चाहिए! और बिना विकास को कुछ कहे उन्न लोगों ने लड़की तलाश करना शुरू कर दिए.

एक वीकेंड को विकास का बाप ने उसे से कहा कहीं चलना है. विकास के अंकल की कार थी और खुद विकास ने ड्राइव किया और वह लोग किसी के यहाँ गये. किसी ने विकास को नहीं कहा के लड़की देखने जा रहे हे. विकास का बाप ने विकास से सिर्फ़ इतना कहा के वो अपने एक दोस्त के यहाँ जा रहा है.

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सब से सर्प्राइज़ वाली बात यह है के जिसे लड़की को देखने जा रहा था वो लड़की भी शादी नहीं करना चाहती थी और अपने अंकल से जिद किया के वो सामने नहीं आएगी. वैसे लड़की का बाप और विकास के बाप ने एक दूसरे से बात कर लिए थे.

जब लड़की के घर पोंहुचे और विकास और फॅमिली लाउंज में बैठे तो लड़की का बाप ने विकास के बाप को एक तरफ बुलाया और कहा के उसकी बेटी इनकार कर रही है वो नहीं आना चाहती! तो विकास के बाप ने कहा कोई बात नहीं उसने विकास को बताया भी नहीं के उसको लड़की दिखाने के लिए लाया है. तो दोनों बाप ने फैसला किया के दो दोस्त की तरह दोनों आपस में बात चित करेंगे. वैसे विकास का बाप लड़की से मिल चुकी थी उसको पहचानता था, क्यों के कुछ रोज़ पहले वो आया था लड़की को देखने के लिए. उसे वक्त लड़की को पता नहीं था के वो किस लिए आए थे.

वो लड़की कोई और नहीं हमारी सोनिया ही थी! तब वो 18 साल की होने को थी! और तब विकास 24 को होने का था. तो परिवार वालों ने टेयै कर लिए के सिर्फ़ दोस्त की तरह मिलें और लड़के को कुछ पता नहीं चलने देन. मगर विकास को पता नहीं था पर सोनिया को तो पता था के कोई उसको देखने के लिए आया हुआ है!! तो हुआ यह था उसे रोज़, के घर के किसी एक कमरे के अंदर से पर्दे के पीछे चुप कर सोनिया ने विकास को देख लिया था. और सोनिया जब किसी को एक बार देखती थी तो कभी उसका चेहरा नहीं भूलती थी. कुछ लोग इसे सच में होते हे जो एक बार किसी को देखने से जिंदगी भर उसे चेहरे को नहीं भूलते सोनिया उन्न लोगों में से एक थी. और यह तो खास मौका था सोनिया की जिंदगी के लिए तो वो कैसे उसे चेहरे को भूल सकती है? बात नहीं बनी तो वह लोग वापस चले गे एक छोटी सी मुलाकात करके.

यह वही दिन था जब विकास के जाने के बाद सोनिया के अंकल ने उसे से बात किए थे के क्यों शादी के लिए इनकार कर रही थी तभी सोनिया ने बताया था के वो और पढ़ना चाहती है और अपने पेयरों पर खुद खड़ा होना चाहती है. तो अंकल बाअट मान गयी थी और फोन पर विकास के बाप को बताया था के लड़की और पढ़ना चाहती है अभी शादी नहीं करना चाहती. मगर सोनिया की छोटी बहन ने उसके अंकल से बोल दिया के दीदी चुप चुप कर पर्दे के पीछे से लड़के को देख रही थी. तब उसके अंकल ने पूछा था, “अगर तुमने लड़के को देखा तो बता कैसा लगा वो तुमको?” सोनिया नजरें झुकाए हुए बोली थी, “ठीक है मगर अंकल मैं ने ऐसा कुछ सोचा भी नहीं, मैं इंट्रेस्टेड नहीं हूँ, लड़का ठीक है थोड़ा सावनला है मगर अच्छा लगता है फिर भी मुझे अभी नहीं पड़नी इन सब बातों में. अगर लड़का और 6/7 साल इंतजार कर सकता है तब सोचूँगी!” और तब सोनिया के अंकल ने उसको बताया, “अरे लड़के को पता भी नहीं था के वो यहाँ लड़की देखने के लिए आया था वो तो यही समझ रहा था के उसका बाप मेरा दोस्त है और हूँ मुझसे मिलने आया है.” यह सुनकर सोनिया हेराँ हुई थी. और फिर अपने अंकल से ज्यादा सवाल पूछने पर पता चला के लड़का भी शादी के लिए अभी तैयार नहीं इसी लिए बाप ने कुछ नहीं बताया था उसको, मगर उन्न दोनों को एक दूसरे को दिखना चाहता था के शायद वो सोनिया को पसंद करले और शादी के लिए हाँ कर दे……

तो उसे रोज़ सोनिया ने विकास को तो देख लिया था मगर विकास किसी भी सोनिया नाम की लड़की को ना देखा ना पहचानता था!! तो यह दोनों किस मोड़ पर और कैसे एक दूसरे से मिलेंगे और कब? अब 24 से लेकर 29 की उमर तक किया गुजरती है विकास के जिंदगी में?? यह लंबी कहानी है… आगे चल कर पता करेंगे…..

विकास को यूनिट के तरफ से एक बड़ी सी एक्विप्ड जहाज़ पर जाना पड़ा समालीया के पाइरेट्स का सामना करने के लिए जो इंडियन ओशन के जहाज़ों पर हमला किया करते थे. समंदर में 3 महीनों तक रहना था उसे बहुत पर. और सिर्फ़ 6 कोमांडोस को भेजा गया था विकास के साथ. उसे जहाज़ पर हेलिकॉप्टर के लिए भी जगह था और पिलोटे भी थे ताके जरूरत पड़ने पर वह अटॅक कर सके. फिर से अपनों से दूरी और एक और एक्सपीरियेन्स जो ख़तरों से भरे थे और तनाव में घेरे हुए, अकेलापन और तन्हाई का आलम. विकास का यह पहला एक्सपीरियेन्स था सागर के बीच ओ बीच एक जहाज़ पर दिन, हफ्ते महीने गुजरने का. सब दोस्तों को यह ट्रेनिंग से बदतर लगता था क्यों के दूनयावालों से दूर बिलकुल कटे हुए एक सुनसान जगह पर जीना बिलकुल आसान नहीं था.

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