Darinde Se Mohabbat- 15

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विकास और अफ़ज़ल ने पुलिस में जाकर यह जाने की कोशिश किए के शिरीन के फोन से किया विकासा को कॉल गया था मर्डर वाली रात को. अब यह दोनों कोमांडोस थे तो पुलिस में दोस्त भी तो थे ही, इस लिए आसानी से इन्नको मोबाइल दे दिया गया सब चेक करने के लिए. और पता चला के मर्डर के 3 दिन पहले लास्ट कॉंटॅक्ट किया था शिरीन ने विकासा को वो भी दिन के 2 बजे. जो इंस्पेक्टर उसे केस का इन चार्ज था उसे ने कहा के उसे ने भी सब चेक कर लिए हे और अगर कोई भी शक की गुंजाइश होती तो वो खुद विकासा को इंटेरगेट करता. मगर विकासा उसे मर्डर की दाएरए में बिलकुल नहीं आती थी. फिर भी इस लिए के विकास और अफ़ज़ल ने कहा के उसे सुबह के 8 बजे वो शिरीन से मिलने के लिए आई थी जबकि उसको उसे वक्त कॉलेज में होना चाहिए थे इस लिए इंस्पेक्टर ने कहा के वो विकासा से सवाल करेगा.

और जब इंस्पेक्टर ने विकासा से पूंछ ताज किया तो विकासा का जवाब यह था के वो इसे ही शिरीन को मिलने गयी थी उसको सर्प्राइज़ देने के लिए क्योंकि उसे दिन उसको कॉलेज नहीं जाना था क्योंकि उसे रोज़ कॉलेज में स्पोर्ट्स दे था और उसने लीव लिया था. इंस्पेक्टर ने कॉलेज से कन्फर्म किया के उसे दिन स्पोर्ट था और विकासा लीव पर थी. यह सब अफ़ज़ल और विकास को बताया गया.

अब फिरसे विकास ने अफ़ज़ल से कहा,

“देखा यार हम खमखान विकासा पर शक कर रहे हे, उसको कुछ भी नहीं पता और मैं कल रात उसे के साथ बड़ी बूड़तमीज़ी से पेयश आया था. दरिन्दा बन गया था मैं, वहशी जानवर की तरह सुलूक किया था उसस्स्के साथ कल रात को मैं!”

अफ़ज़ल खामोश था. मगर ख्यालों में गुम था उसे वक्त. और अचानक कहा,

“मुझको अब उसे फ्लैट से निकाल दिया जाएगा, मुझे अपने पेरेंट्स के पास रहना पड़ेगा जब यूनिट मुझको सस्पेंड करेगा ना? तो तू अकेला रहेगा वहाँ और विकासा अकेली रहेगी जब तू रातों को काम करने जाएगा!!”

यह सुनकर विकास के चेहरे का रंग बदल गया! उसको समझ में नहीं आ रही था किया जवाब देन अफ़ज़ल को. शक और डर उसके दिल में घर कर चुका था. और फिर अफ़ज़ल ने कहा के उसको एक आइडिया आया है….. उसने कहा,

“मैं विकासा को सिड्यूस करने की कोशिश करूँ किया? कुछ नहीं करूँगा, बस पता चल जाएगा के वो कैसे है, अगर शिरीन की तरह होगी तो शी विल गिव हरसेल्फ तो में अगर नहीं तो तुमको पता चल जाएगा के वो सीधी है, किया कहते हो?”

विकास ने कहा,

“अरे मैं खुद यह कहना चाहता था तुझसे मगर डरता था के तू इनकार ना करदे, बढ़ाया आइडिया है यार हाँ रात को मैं काम पर जाऊं तो तुम उसको अप्रोच करने की कोशिश करो और धीरे धीरे आगे बढ़ना, चाहे एक दो महीना क्यों ना लग जाए, तुम उसके तरफ बढ़ते रहना, देखना चाहता हूँ के वो सब बात मुझको बताती है के नहीं…. तुम मुझको सभी कुछ डीटेल्स में बताना, ई विल सी के वो भी सब बराबर बताती है के नहीं…इस से साफ जाहिर हो जाएगा के वो कैसी है! ओके ई अग्री विद तीस आइडिया!”

अफ़ज़ल: “ओके फिर आज रात को शुरू हो जाता हूँ. उसकी इज़त करता हूँ इस लिए थोड़ा बियर वियर पी कर जाऊंगा डेरिंग के लिए ”

विकास: “देखो कुछ ऐसा वैसा मत कर देना फर्स्ट दे को ही, आराम से फ्रेंडली अप्रोच रखना शुरू में, वक्त लगेगा, कई दिन लगेंगे उसके करीब जाने में, संभाल के काम करना भाई…”

अफ़ज़ल: “अरे यार थोड़ा बहुत ऐक्टिंग मुझे भी आती है! फिक्र मत करो”

उसी रात को विकास को काम पर जाना था और अफ़ज़ल की फर्स्ट अप्रोच थी विकासा के तरफ. और विकास ने कह दिया था जैसे ही वो अपने फ्लैट में वापस आए उसको तुरंत फोन करके बताए के किया हुआ विकासा के साथ! अब, जब तक अफ़ज़ल विकासा के फ्लैट में होगा तब तो विकास उसको फोन नहीं कर पाएगा क्योंकि विकासा सुन लेगी और पता चल जाएगा के वो फोन कर रहा है अपने दोस्त को.

तो उसे रात को 9 बजे विकास बेचैन था यह सोचते हुए के किया हुआ होगा, अफ़ज़ल उसे वक्त उसके बीवी के साथ उसके फाल्ट में होगा, किया पता किया चल रहा होगा…कहीं उसने विकासा को सिड्यूस कर लिया तो? कहीं विकासा और उसके बीच कुछ हो गया तो? उसका सर चकरा रहा था और समझ में नहीं आ रही था के किया करे…. उसने सोचा उसको यह आइडिया मंजूर नहीं करना चाहिए था…. मगर फिर विकास खुद से कहता के नहीं, उसको अफ़ज़ल पर बहुत भरोसा है वो कुछ ऐसा वैसा नहीं करेगा…. सिर्फ़ विकासा की इम्तहान लेगा और अपने दोस्त को बताएगा, और उसकी शक को दूर करेगा…..

रात के सारे दस बज गये थे और अफ़ज़ल का फोन नहीं आया तो विकास सोचने लगा अभी तक वो विकासा के साथ है? किया बातें कर रहे होंगे वो? क्यों इतनी देर लगा रहा है अफ़ज़ल? कहीं सब गड़बड़ तो नहीं कर देगा….. विकास को चिंता भी हो रहा था और दिमाग काम भी नहीं कर रहा था, समझ में नहीं आ रही था के किया सोचे किया नहीं….

विकासा की फ्लैट में.
अफ़ज़ल ने नॉक किया रात के 9 बजे. विकासा नाइटी पहन चुकी थी और हेराँ हुई के उसे वक्त कौन नॉक कर सकती है. दरवाजे को थोड़ा सा ओपन करके झाँकने की कोशिश किया और अफ़ज़ल को देखते ही अपनी गाउन को छाती पर ठीक से कवर करते हुए ओपन किया यह कहते,

“ओह अफ़ज़ल तुम हो! किया हुआ”

अफ़ज़ल अंदर आते ही विकासा के कंधों पर हाथ किया और कहा,

“मैं तो लूट गया विकासा तेरी दोस्त ने धोका दे दिया अब अकेला हो गया हूँ मैं यार!”

तब तक एकात कदम चल रहे थे दोनों सोफे की तरफ जहाँ विकासा ने अफ़ज़ल को बैठने को कहा.

विकासा बहुत खूब सूरत थी, हीरोइन जैसा शुरू में बता दिया गया है…अस्सल में वो शिरीन से बहुत ज्यादा खूब सूरत थी और बहुत अच्छी फिगर वाली बॉडी थी उसकी. उसकी अड़ाएन जान लेवा थी और कोई भी उसको चाह सकता था यह कहने की बात नहीं थी, देखते ही उसको कोई भी मर्द आशिक हो सकता था……

जब वो बैठ गया, तो विकासा ने उदास चेहरे से उसको देखते हुए कहा,

“मैं समझती हूँ अफ़ज़ल मगर तुमने उन्नको मारा क्यों? चोर्र देते, मारना जरूरी था किया? अब अपने आप को इस हाल में कैसे संभालोगे तुम? हम”

औरत थी, दूसरों के दर्द समझती थी, टीचर भी थी तो इसे हालात में किस को कैसे संभालना चाहिए इसकी काला थी विकासा में.

विकासा भी बैठ गयी उसी सोफे पर और कहा,

“तुम ने पी है ना? किया शराब पीने से घाम कम होती है? अपने आप को बर्बाद मत करो अब. अकेले नहीं हो, हम सब हे ना, तुम्हारा दोस्त विकास तेरे साथ है…..”

अफ़ज़ल होंशियारी के साथ धीरे से अपने सर को उसकी गोद में रखते हुए रोने का नाटक किया और कहा,

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“मैं तन्हा और अकेला हो गया हूँ, जिसकी जरूरत ज्यादा होती है वो तो अब नहीं रही….. बिलकुल अकेला हो गया हूँ विकासा…. कैसे जियूंगा अकेले अब मैं?”

विकासा को बहुत तरस आया और अपने हाथ को अफ़ज़ल के सर पर फेरते हुए बोली,

“ऐसा नहीं कहते, हम हे तुम अकेले नहीं हो.”

उसे वक्त अफ़ज़ल का सर विकासा के गोद में था और अफ़ज़ल के हाथ उसकी कमर पर… धीरे धीरे रोने का नाटक करते हुए वो अपने हाथ उसके जिस्म पर आहिस्ते आहिस्ते फेयर रहा था, कमर से ऊपर कंधे के तरफ बढ़ते हुए…..और विकासा उसको इग्नोर करते हुए क्यों के वो नशे में था उसको मोरल सपोर्ट दिए जा रही थी. उसकी ड्रेस सॅटिन मैटेरियल की थी तो मुलायम होने की वजह से अफ़ज़ल का हाथ फिसल कर नीचे आ गया उसकी जांघों पर, फिर भी विकासा ने इग्नोर किया और अफ़ज़ल के सर पर हाथ फेरती गयी सहलाते हुए जैसे एक रोते हुए बच्चे को चुप किया जाता है.

11 बज गये थे और विकास की बेचैनी बढ़ी जा रही थी, सोच रहा था दो घंटे तक किया कर रहा है अफ़ज़ल उसके फ्लैट में. उसे से रहा नहीं गया और उसने विकासा की मोबाइल डायल किया.

विकासा ने मोबाइल उठाया और जैसे ही कहा, “हेलो विकास….”

तुरंत अफ़ज़ल ने विकासा के तरफ इशारे करते हुए कहा, “सस्स्शह मत बताना के मैं यहाँ हूँ प्लीज़!”

विकासा ने इशारे से पूछा “क्यों?” अफ़ज़ल ने धीरे से कहा “इसे ही इतनी रात को तुम्हारे साथ हूँ उसको ठीक नहीं लगेगा, मत बताओ प्लीज़!”

विकास ने भी होंशियारी किया अफ़ज़ल को फोन नहीं किया और खुद विकासा को किया, और एक्सपेक्ट कर रहा था के पहला जुमला विकासा का यह होगा के अफ़ज़ल आया हुआ है, दुखी है…. मगर विकासा ने वैसा कुछ नहीं कहा…. उससे हेलो कहने के बाद पूछा के वो कैसा है और नींद नहीं आ रही है किया उसको….

तो विकास अब हेराँ हो गया के किया अफ़ज़ल वहाँ से जा चुका है या वहाँ गया ही नहीं….. और उधर विकासा ने नहीं बताया के अफ़ज़ल वहाँ है क्योंकि अफ़ज़ल ने बताने से मना किया…..

विकास ने पूछा “किया कर रही हो? सोई नहीं अभी तक?”
विकासा: सोने ही वाली थी, पेपर्स करेक्ट कर रही थी.

विकास: “हम अफ़ज़ल पता नहीं किया कर रहा होगा!”

विकासा ने तब अफ़ज़ल के तरफ इशारे करते हुए धीरे से अफ़ज़ल के कान तक होंठ लेट हुए कहा, “तुम्हारे बारे में पूंछ रहा है!”

और अफ़ज़ल ने तब भी हाथ से इशारा करते हुए नहीं बताने को कहा. और जब तक विकासा बातें कर रही थी विकास से अफ़ज़ल धीरे धीरे अपने हाथ को विकासा की जिस्म पर फेरर रहा था…. ट्राइ कर रहा था के वो नोटिस करती है या कुछ कहती है, उसका सर तब भी उसकी गोद में ही था और क्यों के विकासा झुकी कर फोन पर बात कर रही थी, तो उसकी बूब अफ़ज़ल के सर से टकरा रहा था और मौके का फायदा उठाते हुए अफ़ज़ल उसकी बूब्स को चेहरे से फील कर रहा था और दबाने की कोशिश किए जा रहा था, मगर विकासा उसे वक्त बिज़ी डेठ विकास से बात करने में……

अब अफ़ज़ल जान बूझ कर वैसा कह रहा था विकासा से के वो कुछ नहीं बताए विकास को…. मकसद यह डेठ के वो बताती है के नहीं….. और फिर अफ़ज़ल को तो सब बताना ही था विकास को… अब देखना यह है के अफ़ज़ल किया करता है खुद मौके का फायदा उठता है या विकास से झूठ बोलता है… दोस्ती का फर्ज निभाता है या दघा देता है, औरत की रूप से धोका खाता है या तन्हाई के आलम में कुछ और करने का सोचता है…. इस खेल में उतार तो गया अब निभा पाएगा या नहीं यह देखना है!!

नशे के हालत का नाटक करते हुए वो विकासा की अघोष में तो था और विकासा फोन पर विकास से धीरे धीरे बातें किए जा रही थी, इसे वैसे बात के अब वो सोने जा रही है नींद आ रही है उसको, पेपर्स करेक्ट कर रही थी वाघहैरा वाघहैरा. उसके बात चित के दौरान जितना हो सका अफ़ज़ल ने उसको चूहने की भरपूर कोशिश की. मगर विकासा विकास से बात करने की जोश में और अफ़ज़ल की हरकतों को नशे और अकेलापन की वजह समझ कर अनदेखा किए जा रही थी, हिलना के एक दो बार उसने फील किया के अफ़ज़ल का चेहरा उसके बूब्स पर डब्बे हुए हे और उसका हाथ उसके कमर को सहला रहे हे….. विकासा यह सोच कर कुछ नहीं बोली के अफ़ज़ल की बीवी अभी अभी चल बस्सी है और वो अकेला है और फिर विकास का दोस्त है, अपना है, फिर थोड़ा नशे में है, इस लिए उसके हरकतों को अनदेखा किया और उसको यूँही मामूली बात समझ कर सीरीयस नहीं लिया.

जब विकास से बात हो गयी तो उधर विकास सोचने लगा के क्यों विकासा ने नहीं बताया के अफ़ज़ल आया था? और फिर सोचने लगा के अफ़ज़ल गया वहाँ या नहीं गया? किया पता अफ़ज़ल अपने ही फ्लैट में हो और गया ही नहीं हो वहाँ?! सोचा के अफ़ज़ल को ही फोन करे फिर सोचा के नहीं कुछ देर और इंतजार करते हे.

और अफ़ज़ल वहाँ तब तक विकासा के गोद में ही था जब विकासा ने उसके सर को उठाते हुए दोस्ताना अंदाज़ में कहा,

“अब जाओ तुम्हें सोना चाहिए अफ़ज़ल, तुम नशे में हो! जाओ अपने कमरे में जाओ.”
तब तक अफ़ज़ल ने उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में पकड़ा हुआ था और कहा,

“विकासा मुझे वो कमरा काटने को दौड़ता है अब, मुझसे अकेले वहाँ रहा नहीं जाता मैं पागल हो जाऊंगा….एक तुम्हीं हो इस वक्त जिससका सहारा ले सकता हूँ इस तन्हाई से च्छुतकारा पाने के लिए मुझे अभी जाने को मत कहो प्लीज़.”

मुस्कुराते हुए विकासा खड़ी हुई और दो कदम चल कर बोली,

“मगर मुझे सोना है अफ़ज़ल, कल कॉलेज जाना है…..”

अफ़ज़ल के समझ में नहीं आया के किया कहें और मजबूरन उतना पड़ा उससे…. दो कदम दरवाजे के तरफ बढ़ते हुए कदम डगमगाने का नाटक किया जब विकासा उसके बगल में चल रही थी, और डगमगाते हुए विकासा के जिस्म पर सहारा लेने के लिए अपने हाथों को बढ़ाया तब तक विकासा ने खुद उसको संभाल लिया और कहा,

“चलो तुमको तुम्हारे कमरे तक चोद कर वापस आती हूँ.”

कॉरिडोर में चलते हुए, विकासा का डायन बाज़ू अफ़ज़ल के कमर पर, और अफ़ज़ल का बयान बाज़ू विकासा के कंधे पर, बस तीन, चार कदम चलना था और खुद विकासा ने दरवाजा खोलते हुए कहा, “लो आ गाए, अब जाओ आराम से सो जाओ.”

अफ़ज़ल ने विकासा का हाथ पकड़ कर अंदर करते हुए कहा,

“अंदर तो आओ, देखो केसेई वीरानी चाय हुई है अब…देखो तो…..”

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