Darinde Se Mohabbat- 5

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दरिंदे से मोहोब्बत Darinde Se Mohabbat- 5
“कहाँ से इतनी ताक़त लेट हो तुम यार? इतने थकान के बावजूद तुमको नींद नहीं आई, तुम रात भर जागते रहे और लेसन्स याद करते रहे” अफ़ज़ल ने पूछा विकास से! और विकास ने सिर्फ़ एक छोटी सी मुस्कुराहट से उसको जवाद देते हुए कमरे से निकल गया.

बहुत सारे टेस्ट्स, एग्ज़ॅम्स हुए और विकास सब में अव्वल आया. उनके सभी दूसरे दोस्तों को भी पता था के विकास का लक्ष्य कुछ और है और वो तो पास ही पास होगा.

प्रॅक्टिकल टेस्ट्स में भी सब से आगे था विकास. रेत में, गरम रेत में घूँसे मारने से विकास के मुट्ठी पर गहरा दाग हो गया था, वह काले हो गए थे, पंजे के हड्डियाँ घायल होकर सुख गये थे, खून बहने के बावजूद भी विकास घूनस्सा मारता था गरम रेत पर; बाकी के लोग जैसे ही पाँजा ज़रा सा लाल होता था तो रुक जाते थे और कई तो मेडिकल लीव्स की माँग करते थे.

पूरा एक साल और गुजरा वैसे ही बहुत कड़क, कठिन ट्रेनिंग करते हुए. हेलिकॉप्टर से छलाँग लगाया गया कई बार, प्लेन से रस्सी कमर में बँधे हुए एक दूसरे को लाइफ सेविंग सिखाया गया. अपने किसी दोस्त को किसी पहाड़ी इलाके में एक जीप जाकर चोर्र दिया करता था और अब हेलिकॉप्टर से उसको ढूंढ. कर ऊपर से निकालने का टास्क मिलता था पूरा करने को. विकास को यह टास्क बहुत पसंद था क्योंकि उसको ख़तरों से खेलने का बड़ा शौक हो गया था. हेलिकॉप्टर से रस्सी से बँधे इसे लटकता था जैसे बच्चों का खेल हो और पल भर में किसी भी चीज़ को उठाकर बाहर लेजता था.

हेलिकॉप्टर पाइलट की ट्रेनिंग भी दी गयी उन्न सब में से सिर्फ़ 4 को जो ज्यादा काबिल थे. बेशक विकास पहला था हेलिकॉप्टर उड़ाने में. वैसे कोई भी कोमांडो पाइलट तो नहीं बनने गये थे मगर बेसिक्स उन्नको सीखना जरूरी था ताके वक्त आने पर जरूरत पड़े तो वो उड़ा सके एक हेलिकॉप्टर को.

अब एक रोज़ कुछ ऐसा हुआ.

कहीं दंगे फ़साद हो रहे थे किसी शहर में किसी कारण. पुलिस वाले तो वहाँ गये ही हुए थे लाती चार्ज हो रहा था. कोई 150 पुलिस वाले 1000 लोगों से फाइट कर रहे थे. एमर्जेन्सी यूनिट का सहारा लिया गया…… और इसे हालात में कैसे निपटना होता है इस लिए विकास की ग्रुप को वहाँ भेजा गया एक सपोर्टिंग यूनिट बना कर. कोमांडो का यूनिफॉर्म फुल ब्लैक कलर का था. और चेहरा नकाब के पीछे छुपा रहता था. उसे ग्रुप की बहुत सारे यूनिफॉर्म्स थे. जब ट्रेनिंग करते थे तो अलग यूनिफॉर्म, किसी अफीशियल काम पर जाते थे तो अलग किस्म की यूनिफॉर्म, एमर्जेन्सी काम के लिए अलग यूनिफॉर्म, और कोमांडो की तरह उतरना होता था तो वो काला यूनिफॉर्म जिसे में उन्न सब के चेहरे छुपे होते थे. जाने से पहले उन्नको एक सुपीरियर ने ब्रीफ किया इन लवज़ों से

“तुम लोगों को अपने स्पेशल डंडे का इस्तेमाल करना है और कुछ नहीं. नो फाइरिंग, नो गॅस, नतिंग ओन्ली हिट्टिंग. हिट तोसे बॅस्टर्ड्स हूँ अरे डिसटरबिंग लॉ और आर्डर ओवर्तेरे! सिर्फ़ उन्न लोगों को मारना है जो शीसे तोड़ रहे हे, जो दुकानें लूट रहे हे, जो कार, बस में आग लगा रहे हे. जाओ सब, वापस आने के बाद तुम लोगों को एक अजीब से खुशी महसूस होगी आज! दिल का भड़ास निकलेगा जाओ सब और भी बेक सक्सेस्फुल!! शो वॉट यू 12 अरे केपबल ऑफ!”

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तो उसे रोज़ 12 कोमांडोस अचानक वहाँ पोुनचे जहाँ दंगा हो रहा था. लोग मारा मारी पर उतार आए थे और जो मुत्भेर पुलिस और उन्न लोगों के बीच हो रहा था बहुत गंभीर था. चारों तरफ आग लगे हुए थे, कुछ लोग चिल्ला रहे थे कुछ घाअयाल थे, बहुत सारे लोग पठार चला रहे थे पुलिस वालों के तरफ, कई पुलिस वाले खून में लथपथ थे… कुछ लोग भाग रहे थे कुछ सच में दुकानों में आग लगा रहे थे, कुछ दुकान के दरवाजे तोड़कर अंदर से समान चुरा रहे थे…. कई लोग एक बस में आग लगा रहे थे, कोई तैयार बीच सड़क पर रख कर आग लगा रहे थे….. नज़ारा गरम और खतरनाक था.

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जिसे स्पेशल ट्रक में विकास और बाकी लोग वहाँ आए तो वो ट्रक रास्ते के बीच ओ बीच रुका और 12 नकाबपोश कोमांडोस ट्रक से बाहर निकले….. उसके बाद जो हुआ कमाल का हुआ!! दो घंटों से पुलिस वाले सब को रोकने की कोशिश में लगे हुए थे मगर नाकामयाब थे और इन 12 लोगों ने सब कुछ 10 मिनिट्स में रोक दिया! कैसे? देखते हे…..

 

विकास सब से आगे उतरा ट्रक से…सिर्फ़ उसके एँखहें दिख रहे थे, उसके बाद एक एक करके उसके 11 दोस्त उतरे….. सब ने किसी ना किसी को टारगेट करते हुए उन्न के तरफ बढ़े रफ्तार से…. आज इन सब को दिखना था के इतने कठिन ट्रेनिंग और मुसीबत झेलने के बाद यह किस काबिल हुए हे, आज इन्नके इम्तहान का दिन था. विकास की एँखहें लाल हो गये थे जिसे वक्त वो एक आदमी के तरफ तरफ रहा था जो एक आग लगे हुए बस में पेट्रोल चिड़क रहा था…. उसे वक्त वो आदमी सामिर के लिए एक दुश्मन था, अमन का दुश्मन, देश की सुकून का दुश्मन, आतंक फेयलने वाला दुश्मन और विकास को उसे मारना था रोकने के लिए क्यों के दो घंटे से वो यह सब कुछ कर रहा था. कोमांडोस के पास जो डंडा होता था वो नॉर्मल लाठी नहीं जो हवलदार उसे करते थे, इन के डंडे स्पेशल काले रंग के थे जो एक लोहे की तरह थी, उसे से एक बार मर खाने से हड्डी तो टूटता ही था…. विकास ने उसे आदमी पर चार्ज किया एक बार दो बार तीन बार चार बार, मारता गया मारता गया उसे आदमी के पीठ पर, पयेरोन पर, वो चिलाता गया, विकास मारता गया, उसके गान्ड पर मारा, कांधों पर मारा, चेहरे पर मारा, वो आदमी रोने लगा भागने लगा विकास उसके पीछे गया, पकड़ कर ज़मीन पर पटका और फिर से मारने लगा, वो आदमी गिड़गिदाने लगा, “मुझे माफ करदो फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा मत मारो मर जाऊंगा मत मारो…” मगर विकास नहीं रुक रहा था बिलकुल एक जलाद की तरह उसको मारता जा रहा था अपने उन्न सभी ट्रेनिंग में किए गये सितम को याद कर कर के सब भड़ास निकाल रहा था….. और एग्ज़ॅक्ट्ली वही उसे के बाकी के 11 दोस्त भी कर रहे थे…. जिसे जिसे आदमी को इन सब ने मारे सब लहू लुहान हो गये थे….. सब उसी हालत में थे जिसे में विकास था, सब अपने अपने झेले हुए दुख और घाम को याद कर रहे थे मारते वक्त… सब अपने कठिनाइयों को याद कर रहे थे दुश्मन को मारते वक्त…. गरम रेत पर लेटना, भारी दरखत को काँधे पर धोना, पहाड़ चहाधना और उतरना, कीचड़ में गले तक घंटों भर रहना, तपती हुई आग के सामने घंटों पर बँधे रहना…. सब के सब को दुख भरे ट्रेनिंग के लम्हें याद आ रहे थे उसे वक्त….. बाकी के लोगों ने जब इसे मर खाते हुए लोगों को देखा तो बहुत सारे भागने लग गये….. मगर एक आदमी ने विकास पर हुँला करना चाहा क्योंकि उसे मर खाते हुए आदमिन का दोस्त था शायद…. विकास ने अपने पहले टारगेट को चोर्र कर उसे के पीछे लग गाया…. इस बार विकास ने अपना डंडा नहीं इस्तेमाल किया लात और घूँसे उसे किया उसे आदमी को वो मर मारा वो मारा के उसके बाकी के 11 दोस्त खड़े होकर देखने लगे…. और जितनी भी फसादी थे सब भाग गये… सिर्फ़ जो घायल पड़े थे उन्नको पुलिस वाले आंब्युलेन्स में डाल रहे थे.. विकास उसे आअदमी के चेहरे का नक्शा बदल दिया घुसों से… उसे आदमी का होंठ फटकार लटक गया, उसके घुटने टूट किए, हड्डी की टूटने की आवाज़ सुनाई दिया बाकी के दोस्तों को…. फिर भी विकास मारते चला जा रहा था….. जैसे एक जुनून सवार हो उसे पर उसे वक्त…. तब बाकी दोस्तों ने विकास को आकर रोका, उसको संभाला, और सब वापस यूनिट चले गये….

उसे रोज़ अपने कमरे में सब खामोश बैठे रहे काफी देर तक. कोई कुछ बात नहीं कर रहे थे. सब बिलकुल शांत थे. सब सिर्फ़ उसे दृष्ट को याद कर रहे थे जो फ़साद में हुआ था. विकास को उसे आदमी का चेहरा दिख रहा था लहू लोहान… उसके कानों में उसे आदमी की पुकार सुनाई दे रही थी , “मुझे माफ करदो मैं फिर कभी ऐसा नहीं करूँगा, मत मरो मत मरो मुझे!!” उसके बाकी के दोस्त भी अपने अपने किए कारनामे को याद कर रहे थे और वही दृष्ट दिख रहे थे सब को…..

तब एक ने बात करना शुरू किया और हँससटे हुए कहा,

“बॉस ने ठीक कहा था के आज दिल का भड़ास निकलेंगे हम सब! सच में दिल को ठंडक पोुंची ना? हम सब में से कौन है जिसके दिल को चैन नहीं मिला आज?”
और किसी दूसरे ने कहा,

“आज मुझे पता चला के स्पेशल स्क़द वाले क्यों इतना मारते हे!! मेरा एक चाचा एक दिन एक राइयट में पकड़ा गया था बस पर पठार चलाते हुए, और उसको मैं ने इतना मर खाते हुए देखा था और सोच रहा था के वो इंसान ही था जो चाचा को उसे तरह मर रहा है? – अब समझ में आया के सब इसे कठिन ट्रेनिंग का नतीजा है!! सब भड़ास निकालते हे पब्लिक पर!!”

और विकास ने जवाब दिया,

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