Darinde Se Mohabbat- 21

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“इफ़ यू दो नोट चुत उप मैं तुम्हारे मुँह पर पट्टी बन्धूंगा समझी तुम? बिलकुल बोलना बाँध करो…. मैं कोई तुम्हारा बाय्फ्रेंड नहीं हूँ जिससे तुम इतना खुलके बात किए जा रही हो!! तुम्हारा अफ़रन हुआ है समझी तुम? यू अरे बीयिंग किडनॅप्ड सिल्ली गर्ल!!”

सोनिया जो उसके खींचने से चल रही उसे वक्त रुक गयी और उसके आंखों में देखने लगी थोड़ी सी फ़िकरमंद होकर और एक हाथ से अपने बाल को चेहरे से हटाते हुए विकास से कहा,

“मुझे?? और किडनॅप? हाहहाहा!! मैं कोई करोड़पाती की बेटी नहीं जो तुमको कड़ोक रुपये मिलेंगे मुझे किडनॅप करने से! मज़ाक अच्छाह है वैसे मिस्टर चुत उप!!”

उसे वक्त विकास को भी रुकना पड़ा था क्यों के सोनिया रुक गयी थी… तो उसकी जवाब को सुनकर विकास को हेरानी हुई के यह लड़की या तो बहुत बड़ी नौटंकी है या सच में एकदम भोली है….. और उसको फिर खींचते हुए आगे बढ़ने लगा…. वो बहुत तेज चल रहा था जिससे सोनिया को दौड़ना पर रहा था उसके पीछे…. और कुछ दूर चलने के बाद सोनिया ने कहा,

“मिस्टर चुत उप तुमने मेरे हाथ को बहुत ज्यादा ज़ोर से पकड़ा है और तुम्हारे इतने सख्त हाथ मेरी कलाई को तोर देगी ज़रा हाथ ढिल्ला करो ना मेरी कलाई दुखने लगी है…..”

विकास के दिल को दर्द हुआ यह सुनकार और बहुत अजीब महसूस हुआ उसको…. मूधकर देखा सोनिया को और कहा, “तुम इतनी कोमल क्यों हो? इतनी नाज़ुक कैसे हो? तुमको चूहने से अजीब सा तो लगा मुझे मगर मुझे जो काम करना है वो करके रहूँगा, तुम ज्यादा भोली बनने की कोशिश मत करो सब समझता हूँ मैं तुम लड़कियों को!!” और फिर तुरंत विकास सख्त हो गया और हाथ थोड़ा सा ढिल्ला करके उसको खींचता गया…….

और जब उसे जहघ पहुंचा जहाँ से गन्ने के खेत के अंदर दाखिल होना था तब तमाशा शुरू हुई……

सोनिया रुक गयी और बहुत हयरानी में कहा, “रुको रुको!!! अंदर कहाँ ले जा रहे हो. मैं अंदर नहीं जाने वाली खेत में!! तुम्हारा नियत कुछ ठीक नहीं लग रही अब!”

और अब विकास ने उसके दोनों कांधों को मज़बूत से पाकरते हुए उसको झींझोर कर उसकी आंखों की गहरायों में देखते हुए कहा,

“अब समझी तुम? अब आई समझ के किडनॅप हुई हो? चलो अंदर वरना इस बार ऐसा थप्पड़ मारूँगा के चेहरा फट जाएगा!!”

सोनिया का दिल जोरों से धड़कने लगा और दो बंद एनसू टपक गये उसकी आंखों से…. और आंख पोंछते हुए चारों तरफ देखा के कोई तो नज़र अजए जो उसका सहायता कर सके, जब कोई नहीं दिखा तो कहा;

“मरो जितना मारना है अब मैं नहीं चलने वाली!”

तो विकास ने उसको गोद में उठाया और खेत के अंदर गुस्स गया…. सोनिया उसको अपने नाज़ुक हाथों से पीत्ने लगी रोते हुए और बोलती गयी, “नहीं जाने दो मुझे, चोर्र दो मुझे प्लीज़ मुझे जाने दो….” मगर विकास बढ़ता गया गन्ने के खेत के अंदर…. गन्ने के पतीतों ने कई बार सोनिया के कोमल चमरी को घायल किए पर बिना रुके विकास बढ़ता ही गया कभी तेजी से चलते और कभी भागते हुए भी…सोनिया बहुत हल्की थी ज्यादा वज़न नहीं था उसका, विकास तो पूरे दरखत लेकर पाहाढ़ चढ़ा और उतरा है तो सोनिया जैसे हल्की फुल्की वज़न वाली को उठाकर दौड़ना उसके लिए आसान काम था… एक दो बार सोनिया चिल्लाई भी मगर कौन उसकी आवाज़ सुन सकता था वैसे जगह पर…..

सोनिया रो रही थी, कभी विकास के काँधे पर तो कभी उसके नक़ाब वाले चेहरे पर मर भी रही थी, मगर उसके नाज़ुक हाथों से कहाँ चोआत लगने वाला था विकास को….एक बार सोनिया ने विकास की नक़ाब को खींचने की कोशिश की, मगर नहीं निकाल सकी, उसे में एक एलेक्ट्रॉनिक सिस्टम था जो विकास के अलावा कोई नहीं निकाल सकता था…. नक़ाब सोफिस्टीकेटेड मॉडर्न टैक्नोलॉजी से बना हुआ था खासकर कोमांडोस के लिए, और रब्बर मैटेरियल से था वो नक़ाब, मगर देखने में कपड़ा लगता था.

आख़िर में उसे गद्दे के पास आ गया विकास सोनिया को गोद में लिए और वहाँ उसको उतरा. सोनिया का रोना बंद हो गया उसे जगह को देखते ही….. खेत के बीच अचानक एक खुला हिस्सा जहाँ उजाला बिखरे हुए थे, धूप था, और चारों तरफ गन्ने के सूखे पत्ते….. सोनिया बहुत हेयरानी से विकास के आंखों में देखते हुए पूछा,

“यह किया है? कौन सी जगह है यह एक गन्ने के खेत के अंदर? किया होता है यहाँ आख़िर तुम हो कौन और किया चाहते हो तुम?”

विकास हंफ़फ रहा था और उसका गला सुख गया था. सोनिया ने उसको हनफफ्टे हुए देख कर उसको पानी देते हुए कहा,

“लो पियो तक गये हो तुम, मुझको इतनी दूर तक उठा कर भागते हुए… वैसे बहुत मज़बूत हो मुझे आज तक किसी ने इतने दूर तक नहीं उठाया है, मेरे अंकल ने भी नहीं शायद!! हिहीही”

विकास ने पानी पिया उसकी बोतल से और उसे से कहा,

“अब हंसस रही हो? अभी तो रो रही थी तुम? कैसी लड़की हो तुम?”

सोनिया बोली;

“मुझको यह जगह बेहद पसंद है एक परियों की कहानी वाली जगह सी लग रही है, कोई सोच भी नहीं सकता के इतने घने गन्ने के खेत के बीच में ऐसा एक प्लॉट भी हो सकता है…. एक फेरी ताले पढ़ी थी मैं ने जिसे में इन बच्चा इसे एक दरखत के अंदर घुस कर किसी और दुनिया में चला जाता है बिलकुल वैसा महसूस हो रहा है मुझे…. ओूऊऊऊऊव!!”

विकास उसको अजीब नजरों से देख रहा था और उसकी बाज़ुओं पर पत्ते के खराचों को देख रहा था खून निकल पड़े थे कई जगह…. और सोनिया भी “इसस्स्शह” करते हुए खून साफ कर रही थी और कहा, “जल रही है इस पर डेटोल लगाना चाहिए वरना इन्फेक्षन भी हो सकता है….”

विकास बोला सब कुछ है, फर्स्ट ाईड बॉक्स है मेरे पास कॉटन्स भी है लगा लेना ठीक हो जाएगा…. सोनिया उसको हेयरानी से देखते हुए पूछी;

“यहाँ? इस जगह पर फर्स्ट ाईड बॉक्स है? कहाँ है?”

विकास ने कहा, “ठहरो दिखता हूँ!”

और जब विकास ने गद्दे के ऊपर से एक बड़ा सा दरवाजा जैसे लकड़ी को हटाया तो सोनिया छोहोनक गयी नीचे गद्दे के अंदर देखते हुए…. फिर तुरंत विकास ने उसका हाथ पकड़ा और खिन्नचा नीचे उतरने के लिए….. सोनिया ने इनकार नहीं किया क्योंकि उसे वक्त वो बहुत इंप्रेस हुई थी उसे जगह से और जानना चाहती थी के अंदर किया है…. ऊपर से नीचे देख रही थी तो बिलकुल एक साफ सट्रा कमरा जैसा दिख रहा था और अभी विकास ने उसे से कहा के उसके पास फर्स्ट ाईड बॉक्स है तो सोनिया ने सोचा एक घर जैसा है नीचे इसी लिए आसानी से उतार गयी विकास के साथ सीधी के जरिये….

नीचे उतरटेही विकास ने ऊपर दरवाजे को ढँक दिया और अंदर बैटरी वाले लाइट्स को ऑन किया…. सोनिया इंप्रेस हुई और अपने दोनों हाथों को एक साथ जोड़ कर बीच में खड़े होकर घूमते हुए बहुत खुश दिख रही और उसे जगह की तारीफ करने लगी….

विकास उसको देखे जा रहा था और सोच रहा था के किया यह लड़की सच में भोली है या इसस्क दिमाग थोड़ा साकडा हुआ है…. कोई और होता तो चिल्लाती शोर मचाती, यह तो खुश हो रही थी…. और कुछ देर पहले रो रही थी और अब खुश हो रही है हँससटे हुए, किया लड़की है यह….. विकास ने उसको फर्स्ट ाईड बॉक्स दिया और डेटोल इस्तेमाल करने को कहा….. सोनिया ने कहा;

“क्यों? मुझसे नहीं होगा यह सब , तुमको करना होगा, तुम लगाओ डेटोल, मुझसे नहीं होगा… मेरा चले तो कभी नहीं लगौन बहुत जलती है…… विकास ने उसका भोलापन देखते हुए मुस्करा दिए और कॉटन को डेटोल से भीगा कर सोनिया की कलाई को थामा और देखा के जिसे जगह उसने उसकी कलाई पकड़ कर खींचा था वो बहुत ही लाल हो गये हे और विकास के उंगलियों का निशान अब भी बाकी थे वहाँ….. विकास ने उसकी आंखों में देखा, फिर उसकी नाज़ुक हाथ और बाज़ू को देखा, सोनिया भी हर बार विकास के आंखों में देख रही थी, कभी अपने घायल हाथ और बाज़ू को कभी विकास के आंखों को…. सोनिया को पता लगा के विकास को अफ़सोस हो रहा है उसकी खराचों को देख कर तो कहा;

“मामूली खदाच है जल्द ठीक हो जाएँगे डोंट वरी.”

फिर विकास ने डेटोल अप्लाइ किया तो सोनिया चीख उठी… तो विकास ने जल्दी से उसे जगह पर फूँक मारा जहाँ डेटोल लगाया था और नजरों को ऊपर करके सोनिया के चेहरे में देखा तो उसकी एँखहें बाँध थी दर्द को सहने के लिए…. चार, पाँच जगाओं पर खराच हुए थे गन्ने के पत्तों से तो उन्न सभी जगाओं पर विकास ने डेटोल लगाए, और तब तक सोनिया ने एखों को बंद किए हुए थे जलन की दर्द सहने के लिए….. और एक जगह उसके चेहरे पर भी खदाच परे थे ठीक उसकी परेशानी के दाइने हिस्से पर….. और तब विकास ने कहा, “हो गया हाथ में अब तुम्हारे परेशानी पर भी है…..”

तो सोनिया ने एँखहें खोले और कहा, “वॉट? परेशानी पर भी? नहीं वहाँ डेटोल मत लगाओ…वहाँ थोड़ी से सेंट लगा देना इंतजार मैं देती हूँ मेरे बैग में है….. वो जगह डेटोल की महक से भर चुके थे…सिर्फ़ डेटोल की महक आ रही थी उसे कमरे (गद्दे) में….. और जब सोनिया ने अपने बैग से एक परफ्यूम की शीशी निकली और विकास को दिया उसको परेशानी पर लगाने को तो उसे शीशी को खोलते ही बहुत अच्छी खुषभू से कमरा भर गया…डेटोल की महक को मर डाला परफ्यूम की खुषभू ने….. विकास ने धीरे से सोनिया के परेशानी से उसकी बाल हाटाय अपने उंगली से और हल्के से थोड़ा सा परफ्यूम अपने उंगली में लेकर उसको परेशानी पर लगाया जहाँ कटे हुए थे गन्ने की पत्ते से…. सोनिया चिल्ला उठी उसे जलन से… और फिर विकास ने उसकी परेशानी पर फूँक मारा….. वैसा करने से विकास सोनिया के बिलकुल नज़दीक आ गया था और उसके जिस्म की खुषभू, थोड़ा पसीने के मिलावट के साथ विकास को महक रहा था और उसको एक सेक्सी फ़ीलिंग हुई और उसने कहा;

“तुम ने कितने आदमियों से सेक्स किया है अब तक?”

सोनिया चुहुंकते हुए विकास के आंखों में देखा और अपने नजरों को तुरंत एक तरफ करते हुए कहा,

“यह कैसा बेहूदा सवाल है, ई हटे सच टाइप ऑफ टॉक्स!”

और विकास का हाथ धीरे धीरे उसकी बाज़ू पर फेरर्टे हुए विकास ने सोनिया को अपने नज़दीक किया….. सोनिया एक तरफ ही देख रही थी मगर जब विकास ने उसको बाहों में जकड़ा तो तुरंत सोनिया ने अपने दोनों हाथों को उसके काँधे को पुश करते हुए कहा,

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“चोररो मुझे, प्लीज़ चोररो मुझे….”

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विकास नहीं चोर्र रहा था और सवाल को दोहराया;

“बोल भी साली कितनों ने तुझको चोदा है?!! बोल!! किस किस से चुदवाई है तू बता मुझे”

सोनिया को खतरा नज़र आने लगा और उसके चंगुल से निकालने की बेकार कोशिश कर रही थी, उसके पहसानि से पसीना टपक पड़े और उसकी दिल की दड़कन तेज हो गयी और जिस्म काँपने लगी…..

डरी हुई आवाज़ में सोनिया उसके आंखों में देखते हुए बोली;

“नहीं मैं ने कभी किसी के साथ नहीं किया यह सब….” और रोने लगी

विकास दाँत पीसते हुए सोनिया के एखों में एँखहें डालकर बोला;

“कुतिया विकासा भी इसे ही भोली थी शुरू में….”

सोनिया ने रोते हुए पूछा;

“विकासा कौन?”

विकास: “मेरी पत्नी, रंडी निकली साली कितनों से चुदवाती थी!!”

ज़ोर से रोते हुए सोनिया ने कहा;

“मेरी शादी नहीं हुई अभी तक तो मैं किया जानूं इन सब बातों को चोर्र दो मुझे…..”

सोनिया रो रही थी और बहुत डरी हुई थी मगर विकास के आंखों में उसे वक्त सिर्फ़ गुस्सा था और वही करने को ठान च्छुका था जो उसको करना था…. उसके दिमाग में उसे वक्त सिर्फ़ एक औरत से बदला लेना था उसको कोई इल्म नहीं थी के सोनिया कौन है कैसी है, उसको सिर्फ़ यह ज्ञान था उसे वक्त के सभी लड़कियाँ चुदवाते रहते हे सभी से…और उसको सोनिया पसंद आया था अपना मकसद पूरा करने के लिए…सोनिया की खूबसूरती और अड़ाएन उसको भा गया था जिसे दिन उसे ने उसको पहले दिन देखा था…अगर विकासा ने उसको धोका नहीं दिया होता तब शायद वो सोनिया को उसे नज़र से नहीं देखता, तब शायद उसकी खूबसूरती की तारीफ करता मगर क्योंकि जिसे वक्त उसने सोनिया को देखा था पहली बार अफ़ज़ल के साथ उसे वक्त उसके दिमाग में बहैओट बुरा ख्याल था लड़कियों और औरतों को लेकर.

सोनिया उसे वक्त एक खूब सूरत सलवार कमीज़ पहनी हुई थी, उसका दुपट्टा गले में लगा हुआ था, और विकास के एँखहें लाल हो गये थे और वो सोनिया के तरफ डरावने नजरों से देखते हुए तरफ रहा था जब के सोनिया एक एक कदम धीरे धीरे पीछे के तरफ हाथ रही थी एनसू भरे आंखों में उसकी जिस्म काँप रही थी… थोड़ी देर पहले ही वो ठीक से बात कर रही था विकास से, उसे ने बिलकुल नहीं सोचा था के ऐसा कुछ होने वाला है उसके साथ…..

विकास ने अचानक उसकी दुपट्टे पर हाथ बढ़ाया मगर सोनिया ने उसको छूने भी नहीं दिया और पीठ करके विकास से खड़े हो गयी… कमरे का दूसरा हिस्सा रीच हो चुक्की थी तब तक सोनिया…. उसने अपने दुपट्टे हो ज़ोर से हाथों में थामे दीवार के तरफ अपने चेहरे को हाथ में छुपा लिया दुपट्टा समेट….

विकास ठीक उसके पीछे खड़ा था, उसकी काँधे से लेकर कमर और गान्ड को निहार रहा था…. शनाया के पीठ पर कमीज़ बस थोड़ा सा नीचे था जिससे उसकी उपरी वाला हिस्सा, काँधे के बराबर सफेद/गोरी रंग की चमरी दिख रहे थे… विकास ने नोट किया के एक काला तिल है उसके पीठ पर और अपने उंगली से उसे तिल को छुआ विकास ने….. उसे च्छुवन से सोनिया और भी डर गयी और काँपने लगी फिर रोते हुए मूधकर विकास के आंखों में देखते हुए बीयललते हुए कहा;

 

“देखो मैं एक अच्छी लड़की हूँ मेरे साथ ऐसा कुछ मत करो प्लीज़, तुमको किया मिलेगा आख़िर, ऐसा नहीं करते, यह ठीक नहीं है, खुद तुमको अफ़सोस होगा जब तुमको पता चलेगा के मैं इसे वैसे लड़की नहीं हूँ….ऐसा मत करो प्लीज़…मैं बहुत शरिफ्फ घराने से हूँ …मेरे अंकल और आंटी बहुत धुखी हो जाएँगे मेरी छोटी बहन है उसको किया मुँह दिखाऊंगी…. अपने ऑफिस के दोस्तों का कैसे सामना करूँगी, और फिर मेरी शादी भी नहीं हुई है कौन मुझसे शादी करेगा प्लीज़ मुझे बक्ष दो…..”

विकास पर उसके आंसुओं का कोई अस्सर नहीं हो रहा था…. उसकी बिल्लाते हुए सिसकयों का विकास पर कुछ भी अस्सर नहीं हुआ और उसने सोनिया की काँधे पर एक चुंबन लिया और अपने जीभ फेरने लगा फिर तो सोनिया चिल्ला उठी यह कहते हुए,

“मुझे आज तक किसी मर्द ने नहीं छुआ है तुम ऐसा नहीं कर सकते मेरे साथ मैं ने तुम्हारा किया बिगरा है भला, क्यों ऐसा कर रहे हो मेरे साथ!!! मुझे जाने दो अब मेरा दम घूत रहा है यहाँ जाने दो मुझे प्लीज़!!” और सोनिया अपने घुटनों पर आ गाई ज़ोर से रोते हुए विकास के सामने….

इस बार विकास भी बैठ गया उसके सामने, क्यों के तब तक सोनिया मूंड़ गयी थी और अब दीवार से पीठ थी उसकी; तो विकास ने अबकी बार उसकी दुपते को इतना ज़ोर से गले से खींचा के सोनिया की उंगली घायल हो गयी दुपट्टे को संभालते हुए, एक उंगली बज्ज भी गयी… जिसे ताक़त से विकास ने उसे दुपट्टे को खींचा सोनिया गिरर पड़ी ज़मीन पर और चिल्लाते हुए विकास ने उसके बाज़ुओं को पकड़ कर उठाया और कहा बहुत ज़ोर से और घुस्से में;

“नाटक बाँध कर कुतिया, सब इसे ही कहते हे मगर चुदवाते सब से हे…तू कोई अलग नहीं जितनी भोली दिखती है उतना ही चुदवाती होगी..पता नहीं कितने याअर होंगे तेरे, और शादी के बाद पति के पीठ के पीछे अपने यार से चुड़वाएगी तू भी!!” और विकास ने सोनिया को लेटाने की बहुत कोशिश किया मगर सोनिया अपनी पूरी ताक़त लगाकर उसे से स्ट्रगल कर रही थी, उसे दावरान विकास का हाथ कई बार उसकी बूब्स पर डब्बे और उसने मास्सला भी…सोनिया रोती जा रही थी एक छोटे बचे की तरह मगर विकास पर कोई अस्सर नहीं हो रहा था उसकी रोने की…

जब विकास ने देखा के बहुत स्ट्रगल कर रही है तो फिर ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा,

एक ऐसा झांपाद मारूँगा के तेरे होंठ फट जाएँगे, चुप चाप लेट यहां इस कालीन पर….”

रोते हुए ही सोनिया बोली,

“मर डालो मुझे, एक गोली मार्दो अपने रिवाल्वर से, या इस चाकू को मेरे आर पार करदो, मगर यह मत करो, मैं मारना पसंद करूँगी मगर अपनी इज़त मुझको बहुत प्यारी है….बहुत संभाल के रखा है मैं ने अपने आप को आज तक… तुम एक भेदे हो, मैं शेयर के मुँह में अजना पसंद करुँघी मगर एक भेदे के हाथ नहीं आना चाहती… चोर्र दो मुझे हाथ मत लगाओ मुझे!!…यह सोनिया ने चिल्ला कर कहा…….

विकास अब सब्र खो चुका था और एक थप्पड़ मारा सोनिया को, मगर इतनी ज़ोर से नहीं के वो बेहोश हो जाए, मगर हाँ उसे थप्पड़ ने सोनिया को खामोश जरूर कर दिया….. अपने चेहरे को हाथ में लिए धीरे धीरे रो रही थी बैठी हुई ज़मीन पर और विकास ने उसके पांव छुए… बहुत नाज़ुक, कोमल थे… और हल्के से विकास ने उसके चप्पल निकले…. सोनिया ने निकालने दिया…. फिर विकास ने उसके एक पांव को थोड़ा सा ऊपर उठाते हुए उसको किस किया…सोनिया सिमट गयी अपने आंखों को ऊपर उठाकर विकास के आंखों में क्खौफ्फ से देखते हुए… सलवार ढिल्ली थी और विकास ने धीरे धीरे अपना हाथ फेररणा शुरू किया उसके पांव से लेकर आहिस्ता आहिस्ता ऊपर बढ़ाता गया अपने एक हाथ को दूसरे हाथ से तंग को संभालते हुए…. सोनिया बैठी थी मगर अपने पांव को अपने तरफ खींचने की भरपूर कोशिश कर रही थी….. मगर उसे में कहाँ इतना ताक़त था के एक विकास जैसा मज़बूत मर्द के हाथ से चुत सकती…. जितना सलवार उठता गया उतना धीरे धीरे सोनिया की अनदेखा तंग , गोरी, कोमल, नाज़ुक विकास को दिखने लगा और वो अपनी शैतानी नजरों से उसको निहारता गया… और फिर एकदम से अचानक एक ज़ोर का धक्का दिया सोनिया को के वो लेट गयी कालीन पर और इतनी जल्दी और झट से विकास ने पांव के तरफ से उसकी सलवार को खींचा के सोनिया को संभालने का मौका ही नहीं मिला और सलवार उसके घुटनों तक खिंच गयी थी तब सोनिया का हाथ घुटने पर पहुंचा सलवार को संभालने को मगर तब तक देर हो चुकी थी विकास के मज़बूत हाथ ने ज़इयदा हिस्सा सलवार का अपने मुट्ठी में पकड़ लिया था और लालची नजरों से देख रहा था सोनिया की जांघों को….. और सोनिया विकास के गंदी आंखों को खौफ भारी नजरों से देखते हुए रोती जा रही थी और हंफ़फ रही थी, उसकी दिल की तेज धड़कन विकास को सुनाई दे रहा था और विकास की नज़र तब सोनिया की छाती पर पड़ी…. तेज धड़कनों के साथ जो मूव्मेंट्स होते हे छाती पर वो विकास देख रहा था के कैसे सोनिया के बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे उसकी सांस्स लेने से, और मुट्ठी में पकड़े सलवार को वो खींचने लगा जबकि सोनिया अपने मुट्ठी में बाकी का हिस्सा संभाले अपने जागों के ऊपर करने की बेकार कोशिश कर रही थी….. फिर होना किया था एक ऐसा झटका दिया विकास ने और पूरा सलवार उसके हाथ में आ गया और सोनिया ने जल्दी से अपने टाँगों को ऊपर उठाकर, कमीज़ को नीचे करते हुए ढकने की कोशिश की….. उसे वक्त सोनिया फिर उठ बैठी थी, टाँगों को मोड़ कर कमीज़ के अंदर छुपा लिया था उसने… विकास अपने कमीज़ उतारने लगा तब….. सोनिया चारों तरफ कमरे में देख रही थी के उसको कोई एक रास्ता वहाँ से निकालने को दिख जाए…मगर वो कहाँ होना था उसे वक्त…. सोनिया ने एँखहें बाँध कर लिए और दिल में प्राथना करने लगी के कोई उसको वहाँ से निकालने अजए……

विकास ने अपना पेंट भी उतार दिया और दूसरे कोने में फेंका ताके सोनिया कहीं उसे में से रिवाल्वर या चाकू निकाल कर खुद को ना माअर डाले, विकास ने यह सब भी सोच रखा था….

और वो बढ़ा सोनिया के तरफ बैठे हुए चल कर चार पांव पर जैसे जानवर चलता है…. सोनिया को कहीं हिल्लने का भी मौका नहीं मिला जब विकास उसे पर टूट पड़ा….. और उसकी कमीज़ निकालने की कोशिश किया…सोनिया जोरों से रोने लगी और चिल्लाने लगी….. मगर विकास ने एक हाआत को उसके मुँह पर रखा और दूसरे हाथ से उसकी कमीज़ उतरे….. सोनिया अब ब्रा और पॅंटीस में थी उसके बाहों में रोते बिल्लत्ते हुए…. उसके एनसू उसके बूब्स पर भी गिरर रहे थे और विकास ने उसकी बूब्स पर उसकी एनसू को चाटते हुए कहा, “हम नमकीन है तेरा पानी भी ऐसा ही होगा जब तू झार्रेगी थोड़ी देर में…”

फिर से स्ट्रगल हुआ जबरदस्त… सोनिया रोते हुए भरपूर कोशिश कर रही थी खुद को बचाने को मगर विकास ने उसकी ब्रा को इस तरह खींचा कंधों पर के ब्रा टूट गया…., हुक टुक गये… और सोनिया के गोल गोल चुचियाँ विकास के आघोष में थे…. उसे वक्त सोनिया का जिस्म विकास के क़ब्ज़े में एक छोटी बच्ची की जिस्म दिख रहा था क्यों के विकास का जिस्म बॉडी बिल्डिंग से बहुत मसल वाले, चावडा छाती वाला बड़ा मर्द का जिस्म सोनिया की जिस्म को बिलकुल कवर कर रहा था….. विकास के लिए सोनिया को संभालना एक खेल जैसा था…वो बहुत कमज़ोर थी और विकास बहुत ताकतवर… सोनिया तक गयी स्ट्रगल करते और पानी पीने की फरमाइश किया….. विकास ने यह जवाब दिया, “मेरे जीभ को चुस्स ले कुतिया इस में पानी से ज्यादा स्वाद मिलेगा….” और उसने ज़बरदस्ती विकासा के मुंह को हाथ से दबा के खोला और अपने जीभ तूससने की कोशिश किया मगर सोनिया ने मुँह नहीं खोला और उसके जीभ को अंदर नहीं आने दिया…. फिर विकास ने कहा, “नहीं पीना है तो ठीक है मुझको अब दूध पीना है वो भी ज़बरदस्ती तू हाँ करे या ना मैं तो दूध पिऊंगा ही पिऊंगा हाहहाहा!! और उसने सोनिया की बूब्स को एक एक करके मुँह में लेकर चुस्सने लगा…. सोनिया ने लाख हटाने की कोशिश किए मगर बेकार रहे उसकी हर प्रयतना….. आख़िर में विकास ने उसको लेटाया और इस बार सोनिया बिलकुल खामोश रही, ना रो रही थी ना स्ट्रगल कर रही थी…. लगता था उसने अपने आप को समर्पण कर दिया विकास के हवाले….. वो चुप चाप लेट गयी…. विकास को हेरानी हुई के क्यों वो अब खामोश हो गयी…. उसने सोनिया के चेहरे में देखा, एनसू से गाल और गला भीगे हुए थे, सिसकियाँ ले रही थी मगर रो नहीं रही थी, हाँ हनन्फ्फ़ जरूर रही थी…मगर कोई स्ट्रगल या इनकार नहीं था….. तो विकास ने उसस्स्के पेट को चुम्मा, फिर जीभ से चाटना शुरू किया….. नेवेल के इर्द गिर्द अपने जीभ को घुमाया , और एँखहें उठाकर सोनिया के चेहरे में देखा… जब सोनिया कुछ नहीं कर रही थी तो विकास का मुँह सोनिया की पॅंटीस पर गया…और उसस्सने पॅंटीस को किस किया और अपने दाँतों से पॅंटीस की एलास्टिक को पकड़ के आहिस्ते आहिस्ते नीचे के तरफ खींचता गया और साथ में ऊपर सोनिया के चेहरे में देखता रहा उसकी रिएक्शन का पता करने के लिए….. मगर सोनिया बूथ बनी थी, ऊपर देख रही थी बिना कोई रिएक्शन के…… और आहिस्ता आहिस्ता उसकी पॅंटीस निकल दिए विकास ने मगर सोनिया जैसी मर गयी हो बिना कोई रिएक्शन के ऊपर ही देखे जा रही थी

विकास खड़ा हुआ और उसके सामने उसने अपना आंडरवेयर निकाला, उसका मोटा, लंबा , खड़ा लंड सोनिया के सामने था मगर वो सिर्फ़ ऊपर देख रही थी बिना कुछ कहे और ना हिल रही थी ना कोई आवाज़ कर रही थी……

अब उसे वक्त सोनिया इस लिए खामोश लेती थी क्योंकि उसको पता था के लाख कोशिश करेगी कुछ नहीं कर पाएगी तो सब चुप चाप सहने में भलाई है…ऐसा सोचा सोनिया ने और खामोश हो गयी….. एक तो शर्म से मर रही थी ऊपर से पता था के उसकी इज़त की वात लगने वाली है और वो कुछ नहीं कर पाएगी तो किया काररती, और कितना चिल्लाटी जब उसकी आवाज़ बीच गन्ने के खेत से बाहर नहीं जा सकती थी….. सोनिया ने सोचा के किया पता अगर वो खामोश हो जाएगी तो विकास को मजा नहीं आएगा और रुक जाएगा…. उसने सोचा के दो में से एक बात ही हो सकती है या तो वो करके रहेगा जो करना है या रुक जाएगा, सोनिया ने सोचा अब जो होना है सो हो… मगर उसके बाद वो बात करेगी विकास से, उसको अपनी गलती की एहसास दिलाएगी, खूड़खुशी करने की धमकी देगी उसको, उसको पछताने पर मजबूर करेगी यह सब सोचा और खामोश हो गयी…सोनिया ने सोच लिया था के किस तरह विकास की ज़मीर को वो बाद में रवणदेगी….

विकास फिर नंगा होकर बैठा शनाया की नंगी जिस्म के पास और उसके हाथ को लेकर अपने लंड पर रखा… सोनिया ने हाथ को खिंच लिया, दोबारा विकास ने उसके हाथ को अपने लंड पर किया, सोनिया ने फिर खिन्नचा, और उसके आंखों से एंससो बहने लगे फिर से…. विकास उसके चेहरे में ही देखते जा रहा था यह सब करते हुए….. तब विकास ने अपने लंड को उसके चेहरे तक लेगया…. वो सोनिया जिससने जिंदगी में कभी गुस्सा नहीं किया था, जिस्सको कभी नाराज़ नहीं हुआ पड़ा था, जिस्सको कभी किसी से चिल्लन तो किया कभी ऊँची आवाज़ में बात तक नहीं करनी पड़ी थी, उसे सोनिया को आज इतना बेआबरू और ज़िल्लत का सामना करना पड़ रहा था….

विकास ने अपने लंड को हाथ में लिए उसके गाल पर फेररा… सोनिया ने चेहरा एक तरफ कर लिया, तो विकास ने दूसरे गाल पर फेररा लंड को, …… सोनिया के और ज्यादा एनसू बहने लगे और रोने की आवाज़ ज़रा सा सुनाई दिए…. और सिसकते आवाज़ में और एक ट्राइ मारा; “ ऐसा मत करो प्लीज़, मेरे कपड़े डाल दो, मुझे बहुत शर्म आ रही है, आज तक किसी ने भी मुझे इसे नहीं देखा, मेरी आंटी और बहन ने भी मेरे जिस्म को इतना न्हीं देखा कभी, अब तो समझो तुम….”

सर्कस्टिकल आवाज़ में विकास ने कहा, “अच्छा, कितने बाय्फरेंड्स ने देखे हे तुझे इसे यह क्यों नहीं बताती, आंटी और बहन को क्यों मेन्षन कर रही है तू?? ले अब चुस्स इससे तेरी प्यास मिट जाएगी….” सोनिया समझ गयी के उसे से बात करना बेकार है वो अनडः और बेहरा है इस वक्त….. तो सोनिया ने चुप रहना बेहतर पसंद किया और अपने हाथों को अपने मुँह पर ज़ोर से दबा लिया ताके विकास ज़बरदस्ती अपने लंड को उसके मुँह से ना लगाए…

विकास कुछ देर तक ट्राइ करता रहा उसके मुँह में लंड घुसाने को मगर नाकामयाब रहा तो कहा, “तो फिर ठीक है मैं तेरी चुत की दर्शन करता हूँ और मेरी जीभ तो उसको खुश कर सकेगी अब….

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