Darinde Se Mohabbat- 17

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अब यह फोन वाली बात और विकासा की अजीब नजरों और मुस्कान वाली बात आप और हम जानते हे मगर विकास और अफ़ज़ल तो नहीं! यह याद रखें सब!!!

उसके बाद होना किया था, विकास और विकासा का रिश्ता और भी मज़बूत हो गया. शक की कोई गुंजाइश नहीं थी और विकास बहुत खुश था और विकासा भी.

कुछ दिन बाद यूनिट में अफ़ज़ल की डिसमिसल सेरेमनी हुई, जहाँ उसको बस समझलो लात मारी गयी, तमाचा मारा गया, बेआबरू किया गया….

वो डिसमिसल, की सेरेमनी एक बड़ी पनिशमेंट की तरह दी जाती है. सभी फोर्स की बारे ऑफिसर्स, सुपीरियर्स की हाज़िरी में और सभी टास्क फोर्स, कमॅंडोस, पुलिस, सोल्जर्स, सबके मौजूदगी में एक बड़ा सा सेरेमनी किया जाता है बिलकुल जैसे एक अवॉर्ड या सर्टिफिकेट ऑफ ग्रेजुएशन देते वक्त किया जाता है वैसे ही इस डिसमिसल को भी करते हे. सब के सामने ओपन एर में.

एक खुला मैदान जैसे एक स्टेडियम होता है वैसे एक जगह पर, एक पोडियम पर बारे ऑफिसर्स पधाड़े हुए थे सब अपने अपने औडे के यूनिफॉर्म्स में. उन्न के सामने मैदान में हज़ारों सोल्जर्स, पोलीस्मेन, कोमांडोस, एमर्जेन्सी यूनिट के मेंबर्स वाघहैरा दर्जनों लाइन्स में अलर्ट खड़े थे जैसे के परदे होने वाला हो. कुछ देर के बाद अफ़ज़ल को यूनिफॉर्म में पेश किया जाता है पोडियम पर. और सभी बॅड्ज, तारे, रिवाल्वर, तलवार, चाकू और अनेक हत्यारों के साथ अफ़ज़ल खड़ा हुआ पाया जाता है. ट्रंपिट की गूँझ ज़ोर से सुनाई देती है और एक ऑफिसर ज़ोर से चिल्लाता है “अटेन्शन!” सभी बाकी के ऑफिसर्स जो लाइन में खड़े हुए थे बिलकुल सीधा चांगुए खड़े हो जाते हे……

और एक एक करके अफ़ज़ल से सभी चीज़ों को सख्ती के साथ च्चिना जाता है. उसको नंगा किया जाता है. अफ़ज़ल चुप चाप खड़ा आंखों से बहते एनसू को रोक नहीं पता, और उसका दोस्त विकास अलर्ट पर खड़े हुए, रोते जा रहा था अपने दोस्त को सबके सामने रुसवा होते हुए देखकर. कितनी मेहनत किए गये थे इन सब को पाने के लिए, कितनी कठिनायों से गुजरे थे, कितने रातों को ठीक से सोए नहीं थे, कितने बार जंगलों में बिना कुछ खाए पिए गुज़ारे थे, सब याद आ रही था अफ़ज़ल को, और आज उसे से सब वापस लिया जा रहा था जो उसे ने इतने मुश्किलों से हासिल किए थे. विकास और आFzअल दोनों सब सोच सोच कर रोते जा रहा थे और विकास भगवान से बीनते कर रहा था के उसको इसे मोड़ से कभी नहीं गुजरने दे….. जो ऑफिसर अफ़ज़ल से सब छीन रहा था बिलकुल एक जल्लाद की तरह जैसे घुस्से में सब नोंच रहा था अफ़ज़ल के बदन से….. यहाँ तक के यूनिफॉर्म को फाड़ कर तुकर्े किए गये अफ़ज़ल के जिस्म पर और उसको खामोश खड़ा रहना था. एक एक बॅड्ज को नोचा गया उसके यूनिफॉर्म से, हर एक सितारे को खींच कर लिया गया….. शर्मिंदगी महसूस हो रही थी अफ़ज़ल को सबके सामने इसे रुसवा होते हुए मगर यह रूल था के वो सजा के तोर पर खामोश रहे और सब वापस चुप चाप लेने देन!
उसे से सब छीन लेने के बाद एक सुपीरियर ने एक छोटी सी स्पीच दिया जिसे में यह बताया गया के क्यों अफ़ज़ल से सब वापस लिया जा रहा है, और अनाउन्स किया गया के अब वो यूनिट की मैंबर नहीं है और इस वक्त के बाद वो जिंदगी में कभी भी कोई भी फोर्स नहीं जाय्न कर सकते. उसको निकाल बाहर फेंका जा रहा था!

स्पीच खत्म हुई तो अफ़ज़ल ज़ोर से रोते हुए घुटनों पर आ गया और बहुत ज़ोर से चिल्ला कर रोने लगा. सब के डिसमिस होने के बाद विकास गया उसको सहारा देने और रोते हुए अफ़ज़ल ने कहा,

“आज एक औरत के लिए मैं ने अपने साअरी मेहनत से पाए गये चीज़ों को गँवा दिए यार! काश वो मेरी जिंदगी में नहीं आई होती तो आज मैं बराबर तुम्हारे तरह यूनिफॉर्म में होता!!”

विकास उसके पीठ थपथपाते हुए उसको ज़मीन से उठा रहा था और फिर अफ़ज़ल विकास को ज़ोर से सीने से लगाते हुए कहा,

“मेरे भाई कुछ भी हो जाए अपने आप पर काबू रखना, याद रखना के तुम किसी दुश्मन के अलावा किसी को कभी मर नहीं सकते, इतने सख्त मेहनत के बाद आज यहाँ पोंहुचे हो मेरी तरह मत गँवाना यार, बहुत दर्द होता है विकास मेरे भाई बहुत दर्द होता है अंदर, सहम नहीं होता जी में आता है खुद को गोली मर लंड अब, जीने की चाह नहीं मेरे दोस्त, मर जाने को मन कर रहा है मुझे…..”

दोनों दोस्त रो रहे थे और बाकी के दूसरे साथी उन्नको सहारा देने के लिए आए और अफ़ज़ल को बाहर तक चोदा गया…………….

वो एक बहुत दुख भरा दिन था क्योंकि उसी शाम को अफ़ज़ल को फ्लैट भी खाली करना पड़ा. उसे शाम को विकास भी था, विकासा भी; जुड़ा होते वक्त सब साथ बहुत रोए और विकास ने कुछ पैसे दिए अफ़ज़ल को कार की हिस्से वाला और उसको कहा के वापस अपने घर जाकर कोई छोटी मोटी बिज़्नेस शुरू करे उन्न पैसों से….

आख़िर में वह जुड़ा हो गये. विकास और विकासा अब अकेले हो गये उसे फ्लैट में. बाकी के लोगों के साथ दोस्ती नहीं थी. एक परिवार के तरह रहने वाले बिछुड़ गये और सिर्फ़ विकास और विकासा रही गये अकेले.

और दिन महीने बीतते गये फिरसे, सब कुछ मामूल की तरह चलने लगा, विकास काम पर तो विकासा घर पर, विकासा काम पर तो विकास घर पर…. कभी कभार अफ़ज़ल फोन करता शुरू में फिर धीरे धीरे वो भी आना बंद हो गया और विकास विकासा खुश थे आपस में. दोनों में बहुत प्यार था कम से कम यही नज़र आ रही था सबको.

हर रात विकास काम पर चला जाता तो रात को तकरीबन 10 से 10.30 तक विकासा को फोन करके गुडनाइट विश करता और कभी कभी दोनों प्यार भरे बातें करते. और कभी विकासा पहले ही फोन करके बता देती के, “आज मैं बहुत ताकि हुई हूँ तो सोने जा रही हूँ प्लीज़ फोन करके जगाना मत!” ऐसा उन्न रातों को होता था जब विकासा 10 बजने से पहले सोने चली जाती थी.

और जब विकास दिन में काम करने जाता तो दोनों शाम को साथ घर वापस आते थे अक्सर. और हर वीकेंड तो साथ ही गुजारते थे और कभी सिनेमा, या अपने आंटी बाप के घर या कहीं तो घूमने चले जाते थे.

और इसे देर साल बीत गये. सब नॉर्मल चल रहा था जब एक रात को एक 10 मेल की बिल्डिंग में आग लगी तो सपोर्ट करने को विकास की टीम को डांकाल विभाग के सहायता के लिए भेजा गया. विकास और उसके यूनिट के 7 लोग साथ गये. सब ठीक से हुआ और सभी लोगों को सेफ बच्चा लिया गया. किसी को चोट नहीं पोंहुचि.

तकरीबन सुबह के 3 बजे ऑपरेशन समाप्त हुआ और सुपीरियर्स ने सबको घर वापस जाने की इजाज़त दे दिए. विकास खुश था क्योंकि बहुत ही कम इसे मौके मिलते हे बीच रात में घर वापस जाने को. तो फ्लैट वापस आया, एक फ्लैट की चाभी हमेशा उसके साथ होता था. खुशी खुशी घर आया, आहिस्ते से दरवाजा खोला क्योंकि विकासा की नींद को डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था और दबे पांव अपने बेडरूम के तरफ बढ़ा.

और जैसे कमरे में दाखिल हुआ तो देखा उसके बेड पर विकासा के साथ एक मर्द सोया हुआ है??!!!!!! विकासा छोटी सी नाइटी में अधनंगी और आदमी सिर्फ़ अपने आंडरवेयर में…… दोनों गहरे नेंढ में थे…….. कौन था वो??

विकासा के बेड पर किसी दूसरे मर्द को देख कर विकास को चक्कर सा आया और उसके हाथ पयर काँपने लगे. उसको एक पल के लिए लगा के वो एक बुरा सपना देख रहा है; खुद से कहा, “यह एक सपना हो, प्लीज़ यह एक सपना हो हे भगवान” और अपने उंगली को दाँतों के नीचे ज़ोर से दबाया तो पता चला के हकीकत का सामना कर रहा है….. आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया, पेयरों ताले जैसे ज़मीन निकल गयी हो और लग रहा था के किसी खाई में गिरर रहा है वो….. खुद अपने आंखों पर यकीन नहीं आ रही था उससे. जहाँ था वही के वहीं खड़ा रहा कुछ देर तक विकासा के चेहरे को देखते हुए….. उसके एँखहें भर आई और कुछ देर बाद आंखों में जैसे खून उबलने लगे….. एक झटके में दिमाग में सभी ट्रेनिंग के उन्न दृष्ट दिखाई देने लगे उससे जिसे में वो कठिन से कठिन मुश्किलों का सामना करते हुए विजय होता था….. वो दृष्ट नज़र आया जहाँ ज़मीन के नीचे अंडरे में कहूंी के बाल चल रहा था पीठ पर एक बड़ा सा बस्ता लिए, फिर उसे दृष्ट को देखा जहाँ पहाड़ की ऊचाई से कांधों पर एक दरखत लिए फिसलती हुई ज़मीन पर उतार रहा था, और देखा उसको ज़ंजीर से बँधा गया है और उसके पेयरों पर 100क्ग की वज़न वाला लोहा रखा गया है जो उसको उठना है…… सभी बहुत कत्िीन ट्रेनिंग की दृष्ट उसके आंखों के सामने नज़र आया……. यह वो पल थे जहाँ सीखया जाता था के चाहे कितना बड़ा मुश्किल सामने क्यों ना हो, खुद को मज़बूत करना चाहिए और दिमाग को ठंड रख कर उन्न मुश्किलों का सामना करना चाहिए बिना फैल हुए!!

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विकास का हाथ उसके रिवाल्वर पर गया, रिवाल्वर को हाथ में लिया, ट्रिग्गर भी दबाना शुरू किया बेड पर आईं करते हुए, और ठीक उसी वक्त उसको अफ़ज़ल की बेइज्जती से यूनिट से सबके सामने बेदखल होता हुआ दृष्ट भी दिखने लगे…… और फिर अफ़ज़ल की बातें याद आई के उसने कहा था चाहे कुछ भी हो जाए कोई ऐसा काम मत करना के उसको कभी अफ़ज़ल के जैसे हालात से गुजरना पड़े….. विकास ने रिवाल्वर को अपने खुद की कँपत्ति पर लगाया और ट्रिग्गर दबाने जा ही रहा था विकासा ने सपनों में कुछ बड़बड़ाया….. तब विकास चल कर बेड के और करीब गया उसे आदमी का चेहरा देखने के लिया….. अंजान चेहरा था, लड़का विकास से भी जवान था, कम उमर का था, शायद विकासा से भी छोटा था उम्र में…. विकास कमरे में चल रहा था मगर एक आहट भी नहीं हो रही थी….यह भी ट्रेंड किया गया था के कैसे एक बिल्ली की तरह चलना चाहिए के किसी को पता ना चले के तुम्न आस पास हो….तो उसे वक्त विकास के अंदर सिर्फ़ एक कोमांडो बस गया था, वो उसे वक्त विकास नहीं था एक मिशन पर एक कोमांडो था…..

दोबारा उसने सोचा और खुद से कहा, “अगर इस वक्त एक कोमांडो हूँ तो यह दोनों दुश्मन हे तो दुश्मन को मर देना चाहिए, किसी कीमत पर भी इन्नको बचना नहीं चाहिए”… और फिर खुद हँससटे हुए कहा, “मगर कल मुझको सजा दी जाएगी के मैं ने अपनी पत्नी का खून किया, वो कमाल के रूल्स हे, पत्नी दुश्मन निकली तो पत्नी ही रहेगी, और दुश्मन देश से चाहे अपना भाई आए वो दुश्मन ही होगा, कमाल के नियम हे…अफ़ज़ल ने बिलकुल सही किया था शिरीन को उड़ा कर…… मैं भी उड़ा दम दोनों को?” उसके दिमाग में एक कशमकश चल रही थी, लगता था ड्रम्स बज रहे हे भेजे के अंदर गहराई में…कानों में कुछ अजीब सी गहरी शोर्र वाला गूँज सुनाई दे रही थी…. लगता था हयपेरटेंतीओं का मरीज़ है, या हे कोलेस्टरॉल या डाइयबिटीस का सिंप्टम्स होने लगा उसको….. बदन में कभी ठंडी तो कभी गरम ल़हेर दौड़ रहा था… और कभी लगता था के बेहोश गिरर जाएगा वहीं के वहीं….. बयान करना मुश्किल था के किया फ़ीलिंग्स थे उसके उसे वक्त.

आख़िर में विकास बैठ गया ज़मीन पर. उसके टाँगें उसका साथ नहीं दे रहा था, काँप रहे थे, जिसे उंगली से ट्रिग्गर दबाने की कोशिश कर रहा था वो उंगली थरथरा रहा था, और उसको सामने कम दिखाई देने लगे….. तब उसको पता चला के उसके आंखों से एनसू बह रहे थे.. उससे खुद नहीं पता चला के कब आंखों में एनसू भर आए और चालक भी गये उसको मालूम ही नहीं पड़ा!! तब उसके मन किया के वो जितना ज़ोर से हो सके उतना ज़ोर से चिल्लाए, मगर चुप रहा, अंदर ही अंदर सब चोआत, घाव, से रहा था….. अचानक उसको लगा के उसका गला बिलकुल सूखा हुआ है जैसे बरसों से पानी नहीं पिया हो और एक तपती चेहरे में पड़ा है…. अब गर्मी छाने लगी जिस्म में…. पसीना छूटने लगा भी मतलब…. थोड़ी देर पहले ठंड लग रही थी और अब पसीना अपने आप बहने लगे…

तो विकास फिर खड़ा हुआ, और रूम में पड़ी बोतल का पानी लिया और एक बहुत ज़ोर का लात मारा बेड पर!! दोनों विकासा और वो आदमी छोहोनक कर उठ बैठे बेड पर!!! विकासा कंबल को खिंच कर अपने छाती पर करना चाहती थी, मगर विकास ने करने नहीं दिया, एक हाथ से विकास ने कंबल को अपने तरफ खिंचते हुए कहा,

“क्यों शर्म आ रही है? नंगी हो? मैं हज़्बेंड हूँ तुम्हारा, हज़्बेंड से शर्म आ रही है और इस के साथ छोड़म छाती करने में शर्म नहीं आई तेरे को रंडी कहीं की?!! तेरी आंटी की चुत तेरे गान्ड को चियर दम अभी के अभी रंडी साली किया बोलती है बता? अफ़ज़ल की तरह तेरे और तेरे यार के गान्ड में इस पिस्तौल की सभी गोलियाँ भर दूनम हीईईईईईईईईईईईिन!!!!!!” बहुत ज़ोर से चिल्ला कर बोला यह सब विकास ने और कांपती हुई आवाज़ में बात निकल रही थी उसे वक्त. विकासा ने उसको कभी वैसे नहीं देखा था….. वो उसे वक्त कोई और लग रहा था, खून सवार था उसके सर पर उसे वक्त और वो कुछ भी कर सकता था. वो दूसरा आदमी जो था थर थर काँपने लगा, लगता था मूठ देगा बेड पर ही…..

अब बड़ी थी विकासा को बोलने की… उसने सोचा के जैसे अफ़ज़ल ने शिरीन को गोली मारी थी वैसे ही उसका भी अंत होने वाली है तो थरथरते जुबान से और रोते हुए विकासा बोली;

“सूणों विकास, गोली मत चलना, मेरी बात सूणों पहले तब जो जी में आए करना….”

विकास ने फिर चिल्ला कर कहा, “अपनी गान्ड बंद राक्ल् कुतिया; कुछ भी बोलने की जरूरत नहीं, सब समझ में आ गया मुझे! किया बोलने को बच्चा है? हे? हाहहहहहाहा!!! मुझे चूतिया बनाया साली; मुझको? विकास को चूतिया बना डाला वो रे औरत वो!!! रंडी पक्का रंडी है तू!! कोठे में नाचने वाली रंडी तुझसे बेहतर है रही कुतिया…. गली के चावरे पर गंदी कपड़े पहन कर धंधे करने वाली तुझसे बेहतर है… वो तो साफ जिस्म बेचकर खाती है किसी को धोका तो नहीं देती!! मगर तू? तू रंडी की आंटी है रंडी की दादी है तू!!”

विकास ने अब बहुत धीरे से बोलना शुरू किया, उसे आदमी के तरफ देखते हां उसे से कहा बिलकुल आराम और धीरे से,

“और तू? यार है इसका हम? कब से चोदता है इससे? हर रात को आता है जब मैं नहीं होता हूँ तो? बता किया करूँ तेरा?”

वो आदमी विकास की आंखों में खौफ भरे नजरों से देख रहा था, उसका पूरा बदन काँप रहा था डर के मारे….

विकास एक दो कदम इधर उधर बेडरूम में चलने लगा, बेड के पास आता फिर दरवाजे के पास जाता फिर वापस आता, बेडरूम को चारों तरफ देखता, विकासा के चेहरे में देखता, फिर उसे आदमी को देखता…. चिल्लाना बिलकुल बंद कर दिया और बिलकुल सुकून और आराम से बात करने लगा, विकासा से कहा;

“जा चोर्र दिया तुझे, चली जा!! आज से तेरा मेरा कोई वास्ता नहीं; तू फ्री है, अपने यार के साथ चली जा फिर जिंदगी भर कभी मेरे आंखों के सामने मत आना…” यह सुनकर विकासा बेड से उतरी और अलमारी के तरफ तरफ रही थी तो विकास ने कहा,

“नहीं, अभी नहीं? रात के 3 बजे कहाँ जाएगी तू? ना! अभी तू आराम से रही ले और दो घारी मैं खुद निकल रहा हूँ…. सुबह 8 बजे आऊंगा, और जब मैं औन तो तुम यहाँ नहीं होनी चाहिए…तेरा एक भी चीज़ इस घर में नहीं देखना चाहता हूँ एक भी नहीं! समझी? अगर कुछ चोर्र देगी तो जला के खाक कर दूँगा….. और सुन्न मेरा एक भी चीज़ नहीं ले जाएगी इस घरर से… जो कंगन मेरी आंटी ने तुझे दिए थे वो यहीं चोर्र के जाना….. एक भी चीज़ जो मेरे तरफ से तुझे मिली थी सब यहीं रख के जाना…. और अगर एक भी मेरा चीज़ ले गयी तो तुझको ढूंढ. कर गोली मर दूँगा समझी तू साली?”

विकासा रोती जा रही थी और सरर हिल्ला कर हाँ में जवाब दे रही थी….

और विकास वहाँ से निकल गया.. एकदम से अचानक कूल हो गया था… पता नहीं किया सोचा, किया टेयै किया अपने दिमाग के अंदर के खामोश सा हो गया और आराम से विकासा को जाने को कह दिया….. अपनी कार को ड्राइव करता गया करता गया … सुबह के 3 बजे सुनसान गलियों में लगता था सिर्फ़ एक ही कार हे देश में जो रास्ते पर चल रहा है…. बिलकुल सुनसान थे चारों तरफ और वो इतना दूर निकल गया ड्राइव करते के उसको खुद नहीं पता था के कहाँ आ गया है…कोई 100 किलोमीटर से ज्यादा ड्राइव कर चुका था जब एक समंदर के किनारे कार रोका और बाहर निकल कर समंदर के तरफ देखते हुए बहुत ही ज़ोर से चिल्ल्लाया तीन बार;
“आआआआआअहह”
“आआआआआआआआहह”
“आआआआआआआआहह”

उसकी आवाज़ एको कर रहे थे समंदर के लहरों के बीच… फिर हानफफ्टे हुए विकास रेत पर बैठ गया…. उसको शराब पीने का ज़ोर से मन कर रहा था उसी वक्त… मगर उसे वक्त सुनसान जगह पर कहाँ से मिलता शराब…… पर जल्दी याद आया उसे के अफ़ज़ल ने ग्लव बॉक्स में एक ब्रॅंडी की बोतल रखा था कुछ दिन पहले.. उसको लगा के जैसे प्यासे को दरया मिल गयी…. ब्रॅंडी का बोतल लेकर समंदर के किनारे अंधेरी रात में पीने लगा और अपनी किस्मत को कोसने लगा….

कुछ देर बाद, थोड़ा सा नशा चढ़ने लगा तो आसमान के तरफ देखते हुए विकास ने कहा,

“अरे ऊपर वाले, किया खेल खेला तुमने हमारे साथ, वो? किया इष्टोरी लिखता है तू ऊपर बैठ कर वो यू अरे थे बेस्ट स्टोरी राइटर, ई सल्यूट यू बॉस!! साला तुमने मेरा और अफ़ज़ल के नसीब मिलकर लिखे थे किया? हे? हम दोंनों को दोस्त बनाया, और दोनों के साथ एक ही सुलूक किया ऐसा क्यों बॉस? किया रिश्ता है इन दोनों दोस्तों की जिंदगी का? कुछ और करना बाकी है किया? हम दोनों की जिंदगी जुड़ी हुई है किया बॉस?”

शराब का नशा काम करने लगा था और विकास के जुबान लड़ख़रने लगे थे….

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