Darinde Se Mohabbat- 16

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तब तक वो विकासा को अंदर खींच चुका था… और विकासा ने चारों तरफ देखते हुए शिरीन की कमी महसूस किया और कहा,

“उदासी चाय हुई है इस फ्लैट में अब तो….”

और अफ़ज़ल ने उसके कमर में हाथ दबाते हुए अपने ज्यादा नज़दीक किया और बेड पर बैठ गया, फिर अपने सार्को विकासा के छाती पर से दबाते हुए, उसको अपने बाहों में लेकर कहा “अब इस उदासी में मैं अकेले कैसे रही रहा हूँ सोचो ज़रा विकासा मेरी किया हालत हो गयी है सोचो…..”

विकासा खड़ी थी और अफ़ज़ल बेड पर बैठा तो जाहिर है अफ़ज़ल का सर उसकी छाती पर दबे हुए थे, फिर विकासा ने अपने हाथों को उसके बालों को सहलाते हुए कहा,

“देखो आगफ़्ज़ल मैं तुमको समझ रही हूँ तुमको इस वक्त सहारे की जरूरत है मगर मैं कर भी किया सकती हूँ..अपने आप को संभलो प्लीज़; मुझसे यहाँ नहीं रहा जाएगा मुझे शिरीन की याद आ रही मैं चलती हूँ…..”

अफ़ज़ल रोक नहीं पाया और विकासा तेज कदमों से निकल गयी…..

तुरंत अफ़ज़ल का फोन बजा और विकास कहा,

“किया यार 11 बजने को है और तुमने कुछ कहा भी नहीं हुआ किया तू नहीं गया था किया वहाँ?”

अफ़ज़ल उठकर दरवाजे से बाहर देखते हुए जवाब दिया,

“यार मैं वहीं था जब तुमने फोन किया था विकासा को और मैं ने ही उसको तुझे बताने से मना किया और उसने तुमको बताया भी नहीं…. मगर सुन, कुछ इसे वैसे बात नहीं अभी तो शुरूवात है…. थोड़े दिनों में पता चल जाएगा के वो सीधी है या नहीं…वक्त लगता है इसे कामों में…..”

विकास: “अचाह यह बता तुमने उसको छुआ कहीं; या चूहने की कोशिश की?”

अफ़ज़ल: “अब फोन पर डीटेल्स दम किया? मैं ने कहा ना अभी कुछ पता नहीं चलने वाला…वक्त लगता है धीरे धीरे बताऊंगा ना. फिलहाल सब ठीक है.”

विकास : “फिर भी इतना तो बता, उसको छुआ तुमने, और उसकी रिक्षन्स किया थी तब?”

अफ़ज़ल: “भाई मेरे मैं उसको धोका दे रहा हूँ, बेचारी मुझपर तरस कहा रही है क्योंकि मेरी बीवी मर्री है…. मैं दुख में होने की ड्रामा जो कर रहा हूँ, शिरीन की काम्मी दिखा रहा हूँ तो दोस्त के नाते तरस तो काएगी ना मुझपर यार… अभी रिज़ल्ट्स नहीं आएगी इसे दोस्त….. कुछ दिनों में समझ में अज़ाएगा….. वैसे तुम मुझ पर कोई शक वाक मत करियो, अपने दोस्त पर यकीन रखना…मैं कुछ ऐसा वैसा नहीं करूँगा…. जिसे दिन लगा के वो मेरे तरफ आ रही है तो मैं खुद निकल जाऊंगा ओट तुरंत तुझको फोन करूँगा ओके मेरे दोस्त? तू बेफ़िक्र रही और चिंता ना कर यार हूँ तेरा, दुहमन नहीं….. तेरे लिए यह कर रहा हूँ मेरा दिल खुद यह करने को राजी नहीं …बस एक दो रातों को और उसे के ज्यादा नज़दीक होने की कोशिश करता हूँ फिर फाइनल रिज़ल्ट अज़ाएगा. अब तू बेफ़िक्र काम कर मैं थोड़ा सो लेता हूँ, गुड नाइट विकास.”

विकास यह सोचने लगा के क्यों उसे वक्त विकासा ने उसको नहीं बताया के अफ़ज़ल वहीं था? क्यों? “सुबह घर जाने के बाद पता चलेगा विकासा कितनी सच्ची है…..” विकास ने खुद से कहा….

अगली सुबह को विकास बेचैन था यह देखने के लिए के विकासा उसको सब सच बताती है के नहीं. हर रोज़ के वापसी टाइम से पहले घर आ गया. विकासा बाथरूम में थी, काम के लिए निकलना था उससे. विकास घर के अंदर आया तो यह जानते हुए के विकासा नहा रही है, दूसरे वैसे सुभों की तरह वो उत्तेजित हो गया और जैसे ही विकासा बाथरूम से टॉवलिया में निकली उसने उसको उठाकर बेड पर पटका….. और होना किया था वही विकासा का चिल्लाना,
“मेरे बाल भीगे हे , बेडशीट भीग जाएगी, चोररो मुझे, अफ, किया कर रहे हो, कॉलेज जाना है हम विकास, चोररो ना मुझे देर हो जाएगी ओईइईए माआआ उफ़फ्फ़ किया कर रहे हो विकास ……”

विकास घुर्रटे हुए यह बोले जा रहा था विकासा की जिस्म को चुस्सते चबाते हुए,
“इसे हसीना मौके को कौन गँवाता है भला, बीवी जब बाथरूम से निकले वो भी अधनंगी बाल भीगे हुए, खुश्बुदार बदन तो मेरा तो खड़ा होगा ही कैसे सब्र करूँ जानेमन….थोड़ा मजा कर लेने दो, प्यास तो बुझा लंड मैं आजा मेरी जान आजा आजा!!!”

और इश्क फ़ार्मा लेता है कुछ ही पल में. उसे दौरान विकास भूल ही गया था के कल रात को अफ़ज़ल आया था उसके घर….. और अब विकासा को ऊपर से नीचे देख रहा था जब वो तैयार होने लगी कॉलेज जाने के लिए. और अंदर ही अंदर सोचने लगा के किया पता के अफ़ज़ल ने उसकी किसी जिस्म के किस हिस्से को छुआ होगा… विकास सोच रहा था के अगर विकासा ने उसको नहीं बताया के कल रात अफ़ज़ल आया था तो उसपर शक करना जायज हो जाएगा….. बस इतना ही सोच रहा था के विकासा ने कहा,

“एक बात बताऊं?”

विकास: “हाँ बिलकुल बताओ किया बात है?”

विकासा: “मगर इस बात को तुम अपने तक ही रखना अभी मत पूछना उसे से! पता नहीं क्यों उसने बताने से मना किया है!”

विकास ने अंजान होने की नाटक करते हुए पूछा,

“कौन? किस से? किया मत पूछूँ?”

विकासा: “कल रात को अफ़ज़ल आया था यहाँ!”

विकास: अच्छाह? क्यों आया था? किया हुआ?”

विकासा: “दुखी लग रहा था, थोड़ा पिया हुआ था, शायद शिरीन को मिस कर रहा होगा, तरस आया मुझे उसपर.”

विकास: “ओह! अपनी पत्नी का खून करता है और अब उसको मिस करता है! किया नाटक है!”

विकासा: “जब कल रात तुमने फोन किया था तो वो यहीं था और उसने धीरे से मुझसे कहा के तुमको नहीं बताऊं के वो यहाँ है, तो उसके सामने कैसे बताती के वो यहाँ है, शायद उसको शर्मिंदगी महसूस हो रही होगी के इमोशनल सपोर्ट के लिए मेरे पास आया है, तो तुमसे नहीं बताने को कहा उसने, इसी लिए कह रही हूँ के मत बताना के मैं ने तुमको बता दिया… जस्ट इग्नोर और डोंट लेट हिं नो डेठ ई टोल्ड यू ओके?”

विकास अंदर ही अंदर बहुत ही खुश हो रहा था के विकासा ने उसको सब कुछ बता दिया और मतलब यह हुआ के वो सच्ची है, बेवफा नहीं. वरना वो सब कुछ नहीं बताती…….

तब तक विकासा तैयार हो गयी, और विकास उसको कॉलेज चॉर्र्ने गया कार में. बारे आशिक मिज़ाज का था विकास उसे सुबह और बहुत खुश लग रहा था, फिल्मी गाने दरवाजा हुए ड्राइव कर रहा था और फ़्लर्ट करते जा रहा था अपनी बीवी के साथ रास्ते भर. कॉलेज जब आ गाए तो विकास ने कहा, “मत जाओ ना! चलो घर वापस चलते हे दोबारा सेक्स करेंगे, मजा आएगा किया कहती हो?” विकासा ने शरमाते हुए कहा, “चल हाथ बदमाश और कार से उतार गयी और विकास को एक फ्लाइयिंग किस भेजा.

एक लंबी सन्न्स लेकर विकास वापस घर आया और तुरंत अफ़ज़ल का दरवाजा खटखटाया.

और दोनों दोस्त मिल बैठे कल रात वाली बात के बारे में डिसकशन करने को. विकास ने जब बताया के विकासा ने उसको सब बता दिया के कल रात अफ़ज़ल आया था और इमोशनल सपोर्ट की जरूरत थी उसे तो अफ़ज़ल ने कहा,

“और किया किया बताया विकासा ने तुझे? सब डीटेल्स दिया तुझको?”

विकास: “वो कॉलेज के लिए तैयार हो रही थी तो सब डीटेल्स कैसे बताती, बस इंपॉर्टेंट तो यह है के तुम्हारे मना करने के बावजूद उसने मुझको बता दिया के तू कल रात वहाँ गया था ना?!”

अफ़ज़ल: “हम ठीक बात है. मगर कल रात तो तू बड़ा बेचैन था यह जाने के लिए के किया मैं ने उसको छुआ और उसकी किया रिएक्शन थी!! किया मैं डीटेल्स में बताऊं सब तुझको?”

यह सुनकर विकास की चेहरे का रंग थोड़ा फीका पर गया और कहा,

“हाँ हाँ ठीक है तू बता सब डीटेल्स में मुझे यार. शुरू से बता….. ”

अफ़ज़ल: “हाँ तो मैं ने थोड़ा सा बियर पी लिया और रात के 9 बजे के करीब वहाँ नॉक किया. वो नाइटी में थी ऑलरेडी…..”

विकास: “हाँ नॅचुरली उसे वक्त हूँ नाइटी में ही होती है, मगर गाउन ऊपर पहनी थी के नहीं?”

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अफ़ज़ल ने हँससटे हुए कहा,

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“हाँ यार एक पराया मर्द ने नॉक किया तो किया बिना गाउन के दरवाजा ओपन करेगी. बेशक गाउन में थी. सब कवर था कुछ नहीं दिख रहे थे.”

विकास: “फिर?”

अफ़ज़ल ने तब सब बात बयान किए. मगर यह नहीं मेन्षन किया के उसने कहाँ कहाँ अपने हाथ फेरे थे विकासा के बदन पर. अफ़ज़ल यह खुद देखना चाहता था के दोबारा वो वैसा करेगा तो विकासा की रिएक्शन किया होगी. वो कुछ अपने लिए बच्चा के रखना चाहता था पता नहीं क्यों. वही जाने उसका किया इरादा था, यह तो कुछ दिनों बाद विकासा से मिलने के बाद ही पता चलेगा. तो विकास ने कहा,

विकास: “तो साफ जाहिर है के विकासा सीधी साधी है ना यार? उसने मुझको सब कुछ बता दिया तुम्हारे मना करने पर भी और तुमने वही बताया जो उसे ने बताई, तो मतलब साफ है ना अब?”

तब अफ़ज़ल बोला.

 

किया उसने तुमको यह बात बताई के वो यहाँ आई थी मेरे फ्लैट में रात के करीब 12 बजे?”

यह सुनकर विकास छोहोनक गया और अफ़ज़ल के आंखों में गंभीरर्ता से देखने लगा.

अफ़ज़ल ने फिर हँससटे हुए कहा,

“डर मत, फिक्र मत कर, सब मेरा ही ड्रामा था, मैं ने कदम डगमगाने की नाटक किया जैसे अब गिरर जाऊंगा तो दो कदम मेरा साथ दिया मुझे यहाँ लाने में उसने और कोई बात नहीं थी, मुझे चोर्र कर वापस चली गयी हूँ. अब खुश?”

विकास के जान में जान आई और कहा,

“तो अब आगे किया प्लान है यार?

अफ़ज़ल: “किया सब बातों का पाता चल गया? किया और दो तीन बार मुझको उसके करीब नहीं जाना चाहिए? तुमने ही तो कहा था के इसे कामों में वक्त लगता है और धीरे धीरे पता लगाना होता है तो एक ही दिन में रिज़ल्ट चाहता है तू? ठीक है अगर तू कहे तो रुक जाता हूँ!!”

विकास ने थोड़ा सोचने के बाद कहा,

“नहीं नहीं, ठीक है तुम आगे बढ़ो और देखते हे किया होता है…. शक तो मुझे भी है क्यों के वो शिरीन के बहुत ही करीब थी, मुझे अब भी लगता है के उसको ज्यादा कुछ पता है मगर वो कुछ छुपा रही है, तू आगे तरफ यार नो प्राब्लम…. मगर एक दोस्त के नाते तू अपनी हद में रहना कुछ भी हो जाए, लिमिट मत क्रॉस करना कह देता हूँ! अगर तुझको ऐसा लगे के वो इसे वैसे है तो अपने आप पर काबू रखना और निकल जाना वहाँ से और मुहजको तुरंत फोन करके बताना ठीक है? मेरा भरोसा मत तोड़ना तुम!!”

दूसरे रात को अफ़ज़ल ने फिर दरवाजा नॉक किया विकासा के यहाँ रात के 9.30 को! और फिर पी कर आया था और ज्यादा नशे में होने का नाटक करते हुए पोंहुचा वहाँ……

विकासा उसको एक्सपेक्ट कर रही थी इस बार और नाइटी में नहीं सारी में थी. अफ़ज़ल ने सोचा था कल रात की तरह उसको नाइटी में ही पाएगा बल्कि सोचा था के इस बार शायद वो जान बूझ कर ऊपर वाला गाउन भी नहीं पहनेगी! मगर सब उल्टा था. अफ़ज़ल ने प्लान किया थाआज उसकी स्ट्रॅप छूने की कोशिश करेगा नाइटी की गाउन को उसके काँधे से सरका कर, मगर उसका प्लान बिलकुल फैल हो गया. अब उसको कुछ और सोचना था उसी वक्त.

इस रात को विकासा ने ऑलरेडी कुछ सोच रखा था अफ़ज़ल के लिए, चलो देखते हे किया होता है अचानक.

अफ़ज़ल नशे की हालत में होने की ड्रामा करते हुए अपने आप को संभालने के लिए विकासा के कांधों पर अपने बाज़ू को किया और दूसरे हाथ से उसका एक हाथ पाकरते हुए डगमगाते कदम से सोफे के तरफ चलने लगा जबकि विकासा ने उसको संभालते हुए वहाँ तक ल्ेआगाई और बैठाया अफ़ज़ल को सोफे पर. अब वो खड़ी थी और अफ़ज़ल बैठा, तो तुरंत अफ़ज़ल ने अपने दोनों बाहों को विकासा के जिस्म के दोनों तरफ करते हुए उसको बाहों में लिया और अपने सर को उसके छाती पर रखते हुए बधबढाया,

“काश शिरीन ने ऐसा नहीं किया होता तो आज मैं आकेआला नहीं होता, तुम्हारी तरह वो मेरी बाहों में होती इस वक्त, विकासा मुझे सहारे की सख्त जरूरत है मुझको निराश मत करना प्लीज़…”

विकासा ने अपने उंगलियों को उसके बालों में फेरते हुए कहा,

“मैं समझती हूँ अफ़ज़ल, तुमको और तुम्हारे दर्द को खूब समझ रही हूँ, तुमको इमोशनल सपोर्ट की जरूरत है और तुम अकेले हो तो इस वक्त इस लिए के मुझे जानते हो मेरे पास चले आते हो सहारे के लिए, समझती हूँ मैं… पर सूणों अफ़ज़ल, तुम मेरे भाई जैसे हो, अपना परिवार का एक सदस्या जैसे हो इस लिए मैं तुमको अपना समझ कर अपने पास आने देती हूँ, मगर सोचो इस हालत में, शराब के नशे में एक पराई औरत के कमरे में जब उसका पति हाज़िर नहीं हो, तो किया मैं किसी को यहाँ आने देती कभी इतना करीब जितना तुम आए हो?”

यह सुनकर अफ़ज़ल को जबरदस्त झटका लगा और तुरंत अपने बाज़ुओं को विकासा के जिस्म से हटाया और उसे से आंख भी नहीं मिला पाया….. तुरंत उठ खड़ा हुआ और कहा,

“मुंह…..मुझ….. मुझे आंटी माआफ्फ करना विकासा मैं शायद गलत कर रहा हूँ मैं चलता हूँ सॉरी गुड नाइट; यू अरे आ वेरी गुड वुमन.. ई आम सॉरी माय डियर सिस्टर…..”

इतना कहा और तेज कदमों की रफ्तार से दरवाजे के तरफ तरफ ही रहा था के विकासा की फोन बजने लगी और विकासा एक अजीब निगाह से देख रहा था अफ़ज़ल को जैसे उसने उसकी चोर्री पकड़ लिया हो… ऐसा लगता था के विकासा को अच्छी तरह से पता था के वो उसको आजमाने के लिए आया था और विकासा ने उसका खेल बिगार दिया, उसकी नज़र में और मुस्कान से कुछ ऐसा ही लग रहा था…. उसकी मुस्कुराहट में एक अजीब, शैतानी नहीं तो बहुत ही कशिश वाली बात थी जिस्सको अफ़ज़ल पढ़ नहीं पाया और अफ़ज़ल यह कहते हुए दरवाजे को खोला और निकल गया,

“विकास का फोन होगा बता देना के मैं आया था और चला भी गया और बाद में उसको फोन करूँगा बायें विकासा.”

विकासा ने फोन उठाया और हेलो करते हुए दरवाजे को लॉक किया अफ़ज़ल को उसी अजीब नजरों से देखते हुए. तब तक अफ़ज़ल निकल चुका था और विकासा दरवाजे को लॉक करते वक्त फोन पर जवाब दिया,

“क्यों तुमने इस वक्त फोन किया? मैं ने मना किया था ना?”

अफ़ज़ल वहीं था सिर्फ़ एक कदम बाहर चला था और उसने विकासा को यह रिप्लाइ करते हुए सुन्न लिया और अपने कदम को रोक लिया वहीं के वहीं और कान लगा लिया विकासा के दरवाजे से सुनाने के लिए के किस से बात कर रही है और क्यों वैसा कहा फोन करने वाले को?!

मगर विकासा पागल थी किया जो उसे दरवाजे के पास खड़ी होकर फोन पर बात करेगी, दरवाजा लॉक करके वो चली गयी अपने बेडरूम में फोन पर बात करते हुए…… अफ़ज़ल को और कुछ सुनाई नहीं दिया. अपना सर खुजाते हुए अफ़ज़ल ने खुद से कहा,

“मैं ने ठीक सुना या सच में मुझको चढ़ गया है आज? उसने भाई किया बना दिया मैं पगला गया शायद अनाप शनाप सुनाने लगा हूँ!!”

और जिसे तरह उसे दिन विकास ने शिरीन को किसी की कार में जाते हुए देख कर शक नहीं किया बिलकुल उसी तरह अफ़ज़ल ने भी शक का ख्याल मिटा दिया विकासा को लेकर और खुद को क़ोस्सने लगा!

एक औरत अगर चाहे तो एक किया हज़ार मर्दों को छूतिए बना सकते हे! औरत में हूँ अजीब सी ताक़त होती है जो एक मर्द में नहीं होता…. अंदर की ताक़त, सब्र की ताक़त, हिम्मत की तााक़त, लंबी इंतजार की ताक़त…. मर्दों में यह ताक़त नहीं होते. दुश्मनों ताक़त मर्द में होते हे औरतों से ज्यादा मगर जो अंदर की ताक़त औरतों में होते हे वो बहुत ही कम मर्दों में होता है. तो यहाँ किया विकासा ने दो मर्दों को उल्लो बनाया? या कुछ और बात हे जो कोई समझ नहीं पा रहा है?

वो अजीब सी मुस्कान किया थी जब विकासा ने अफ़ज़ल को उठकर बाहर जाते देखा? उसकी नजरें किया कहना चाहती थी? किया उसने अपनी विजयाता होने की खुशी दिखाई थी? या उसके नजरों ने यह कहा था के “तू किया मुझको परखेगा, मैं तुमको उल्टा भागती हूँ यहाँ से!” और या फिर उसकी नजरों में एक चाह थी के उसने क्यों अफ़ज़ल को ऐसा कहा के वो जा रहा है और हाथ में आई अच्छी मौका गँवा दिया उसने? उसके और करीब हो सकती थी, उसे से एक और रिश्ता बन सकता था… किया इसे ख़यालात थे विकासा के मान में? यह बाद में पता चलेगा, फिलहाल देखते हे अफ़ज़ल किया कहता है अपने दोस्त को फोन करके.
विकास: “हाँ बता इतनी जल्दी वापस आ गया तू आज? किया हुआ यार? बता!”

अफ़ज़ल: “यार विकास, विकासा एक बहुत अच्छी लड़की है हम खमखन उसे पर शक कर रहे हे… वो बहुत नेक है यार; उसने मुझे भाई बोला यार मेरी बहन है वो यारा!!” — यह कहते हुए अफ़ज़ल के आंख भर आए और विकास बिलकुल खामोश हो गया उसे तरफ…. तो अफ़ज़ल एक लम्हें के बाद बोला,

“विकास?! विकास? हेलो? कट गयी किया यार? तुम हो ना?”

विकास: “हाँ भाई, हाँ हूँ, अजीब बात है ना यार…. हम साले मर्द क्यों ऐसा सोचते हे अच्छी औरतों के बारे में भी? यह कोई एक तालाब की मछली नहीं होते जो सभी मछलियों को गंदे कर देन यार तो फिर हम सब ऐसा क्यों सोचने लगते हे यार धितकार है हम पर यार चाहिये तूओ!!”

विकास बहुत पचता रहा था और अफ़ज़ल भी, दोनों शर्मिंदा थे अपने हरकतों पर.

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