Darinde Se Mohabbat- 19

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विकासा: “एक बार क्यों रात गुजारना चाहते हो? हज़ार बार गुज़ारलो मैं ने कब इनकार किया है? अब तो फ्री हूँ किसी की बीवी नहीं हूँ आजना जब जी चाहे तेरा!! एनिटाइम हॅंडसम!!”

अफ़ज़ल मुस्कराया और कहा;
“ओके अब ई-मैल करता हूँ बाद में फोन करूँगा तुमको बायें विकासा.”

विकास दिन के 2 बजे तक सोया रहा उसे रोज़, जब उठा तो दर्द से सर फटा जा रहा था. अफ़ज़ल था उसके साथ और डिसाइड किया गया के काम पर नहीं जाएगा उसे रात को क्यों के एमोटिओअननली ठीक नहीं था बिलकुल वो. बीवी की दघा, उसका गुस्सा, शराब का नशा, दिल में दर्द, सब कुछ ऐसा था के अगर काम पर जाता भी तो सही से काम पर कॉन्सेंट्रेट नहीं कर पाता. तो फोन करके एक सिक लीव के लिए फरमाइश किया जो मंजूर हुई.
अब बात थी विकासा की डॉक्युमेंट्स पढ़ने की और एसएमएस तो देख लिया उसकी जब यूनिट में फोन करने जा रहा था तब. अफ़ज़ल ने उसे डॉक्युमेंट को पढ़ने पर ज़ोर दिया और कहा के उसने पढ़ लिया है. तो विकास ने उसको कहा के वही बता दे के किया लिखा है डॉक्युमेंट में. मगर आख़िर में खुद पढ़ने गया विकास. पढ़ने के बाद उसने अफ़ज़ल से कहा;

“मुझ पर कोई अस्सर नहीं हुआ उसकी उसे डॉक्युमेंट की. ना ठंड ना गरम…. उसके दिल में इतनी नफरत बस गयी है के वो एक फरिश्ता भी निकली तो उसपर मुठने का मन करेगा मेरा समझा अफ़ज़ल? मेरा अब उसे से कोई भी वास्ता नहीं और सभी रंडियों की तरह मेरे लिए वो पक्का रंडी ही है!”

अफ़ज़ल खामोश था. अफ़ज़ल के दिल में विकासा के लिए कुछ और था और विकास के दिल में नफरत के सिवाय कुछ नहीं. कुछ देर बाद दोनों घर से निकले हवा खाने को. कार लेकर थोड़ा सा ड्राइव किए गये और शाम हुई तो दोनों एक रेस्तरां में पाए गये पीते हुए. हाँ फिर से विकास पीने लगा. और थोड़ा नशा चढ़ने के बाद बोला,

“साला पिछले 10 सालों से देख रहा हूँ के आज कल के सभी लड़कियाँ सिर्फ़ चुदाया रहे हे हर किसी से! इसी लिए मुझे किसी भी लड़की पर बिलकुल भरोसा नहीं था. मैं हमेशा से कहता आया हूँ के सब रंडी होते हे कोई सही औरत नहीं है अपने आंटी और बहन के सिवाय इस दुनिया में…. इसकी आंटी की चुत, क्यों शादी किया मैं ने साला!! यार मुझे गोली मर देना चाहिए था उसे रंडी को यार!!”

नशा चढ़ के बोल रहा था पर सही भी बोल रहा था वो तो…. विकास फिर बोलते गया
“शुरू से, जब बीस साल का था तब से ही तो बोल रहा हूँ के सभी लड़कियाँ एक जैसी है और आज के ज़माने में अच्छी लड़की पाना शादी के लिए आसान नहीं….. मेरे मोहल्ले के दोस्त भी तो बोल रहे थे के पता नहीं फटी चुत मिलेगी उन्नको या एक कुँवारी मिल भी सकती है या नहीं!! साली सब 14 साल की उमर से ही चुदवाने लगे हे आज कल!! सबके बाय्फ्रेंड हे छोटी सी उमर से ही और सब चुदवाते रहते हे …… सब साली आंटी की चुत!! सब को एक एक करके अब चोदूंगा मैं देख लेना!! किसी लड़की को नहीं चोरँगा अब, सब चूड़ेंगे अब!!”

और अफ़ज़ल ने कहा;

“यार जो तेरा हाल है वही मेरा भी, तेरी बीवी ने किसी और से चुड़वाई मेरी भी …. तो मुझे भी वही करना चाहिए तो तू करने को सोच रहा है…. चल एक काम करते हे….. हम कमॅंडोस तो हे ही, बहुत सारे ट्रिक्स आते हे हमको…. कुछ करेंगे तो किसी को पता भी नहीं चलेगा…चल एक गान्ड बनाते हे और सभी उन्न लड़कियों को उठाकर छोड़ेंगे और जरूरत पड़े तो उड़ा देंगे साली को..किया कहते हो?”

विकास बोला;

“नहीं, मैं अकेले काम करूँगा, तू अपना करना…. मैं कल से ही दिन में कॉलेज के पास जा कर लड़कियाँ उतौँगा और लड़कियाँ चोदना शुरू करूँगा…. तू अपने तरफ से वही करना….”

यह नशे के हालत में और घुस्से में बोल रहा था विकास. मगर पता नहीं उसके दिल के अंदर किया चल रहा था. एक कशमकश तो थी, और इमोशनल ब्रेक डाउन जैसा हाल था उसे वक्त उसका….. पत्नी बेवफा निकली और दिमाग सही काम भी नहीं कर रहा था…. और फिर उसने बोलना जारी रखा यह कहते हुए;

“साला अपने घर वालों को किया जवाब दूँगा के बीवी कहाँ गयी? क्यों चोदा उसको? किया बताऊंगा? मेरी छोटी बहन से दोस्ती थी उसकी किया बताऊंगा अपनी बहन को अब? यार तुमने किया बताया घरवालों को मैं? बता मुझे, तुमने बताया के वो किसी से चुदाया रही थी? हे? बोल अफ़ज़ल!!”

अफ़ज़ल बोला;

“भाई मुझे तो कुछ बताने की जरूरत ही नहीं पड़ी क्यों के मैं ने दोनों को अपने बेड पर गोली मारा था तो सब सामने आ गाई बात तो घर वालों के समझ में सब आ गाई कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ी मुझे तो…. ऊपर से आंटी ने दूसरी लड़की देखने की बात कर डाली….कमाल है…मुझे जेल होने वाली है और वो दूसरी लड़की से मेरे शादी की बात चलना चाहती थी कमाल के लोग होते हे यह आंटी बाप भी याअर!!”

रेस्तरां से निकले दोनों दोस्त और किसी चावरे के एक कोने में बियर के बॉटल लेकर पीते हुए बातें किए जा रहे थे….. नशा चढ़ गया था दोनों को… किसी लड़की या औरत को गुजरते देखते थे तो गलियाँ देते थे उन्नको के रंडी हे सब!! बूड़तमीज़ी पर उतार आए थे दोनों. पर किस हालत के शिकार थे दोनों किसी को पता नहीं था. फिर वहाँ से कार लेकर पता नहीं कहाँ ड्राइव करते जाने लगे…. और एक बड़ी सी बिल्डिंग के पास रुके.

कार के अंदर ही बैठ कर पी रहे थे के एक बहुत खूब सूरत लड़की, कमसिन सी, सर नीचे ज़मीन की तरफ झुकाए एक वन के तरफ तरफ रही थी…. विकास ने उसको देखा और इशारा करते हुए अफ़ज़ल से कहा;

“वो देख कितनी भोली भली दिख रही है यह कुतिया, पता नहीं किस किस से चुदवाती होगी साली, रंडी होगी और भोली भली दिखने की नाटक कर रही है साली!!”

शाम के 7 बज चुके थे, सूरज डूबने वाला था, गलियों में हलचल था उसे वक्त. बहुत सारे लोग काम से घर को वापस जा रहे थे और विकास उसे लड़की को देखे जा रहा शैतानी नजरों से….. लड़की कोई और नहीं हमारी शयाना थी….. और ऑफ मंथ था और उसको थोड़ा सा ओवरटाइम करना पड़ा था उसे रोज़…. कंपनी की वन उसकी इंतजार कर रही थी और वो वन में चली गयी…..

विकास कार से निकला, थोड़ा सा लड़खड़ाया, अपने जिस्म को कार पर झुका कर खुद को संभालने के लिए किया और वन में अंदर सोनिया को घूर्रता गया एक शैतानी मुस्कुराहट के साथ… सोनिया ने कुछ नहीं देखा उसकी तो नजरें हमेशा झुकी रहती है और वन के अंदर भी वो बैठ कर नीचे के तरफ ही देलख रही थी, उसकी आदत नहीं थी चारों तरफ देखने की……

विकास बोला,

“तुम मेरी पहली शिकार होगी अब…तुझे को सब से पहले चोदूंगा मैं तेरा रेप करूँगा कुतिया……अब एक प्लान बनाना पड़ेगा मुझे…..तुझको उठाने की…. बड़ा प्लान बनाना पड़ेगा…. कल से प्लॅनिंग शुरू…तू तो गयी रे कुतिया……”

विकास दूसरे दिन काम पर जाने से पहले उसे जगह पर गया जहाँ शयाना को देखा था. मगर उसको यह पता नहीं था के उसे रोज़ शयाना ने ओवरटाइम किया था इस लिए लेट वापस जा रही थी, हूँ समझ रहा था के उसकी नॉर्मल वापसी का टाइम है तो वहाँ कुछ देर इंतजार किया मगर कोई नहीं दिखा उसको.
जिसे जगह वो इंतजार कर रहा था वो एक ऊँचे ऊँचे मॉडर्न इमारतों वाला प्लेस था जहाँ बहुत सारे ऑफिस हुआ करते हे और सिर्फ़ बारे बारे कार की पार्किंग्स थे और बहुत मॉडर्न, लग्षूरीयस रोड्स और गार्डेन्स थे वहाँ. कोई दिखता भी नहीं था, क्योंकि सिर्फ़ ऑफिस खुलने के वक्त और ऑफिस बाँध होने के टाइम वहाँ पर लोग दिखाई देते थे. वरना वो जगह वीरान लगता था, छूती के दिनों वहाँ सिर्फ़ सेक्यूरिटी गार्ड्स दिखाई देते थे.

मामूल के तोर पर उसे जगह से हर रोज़ शयाना जब शाम को 4 से सादे चार बजे निकलती थी तो उसे जगह से कोई 200 मीटर्स तक चलती थी बस स्टॉप तक जाने को. उसे जगह से एक मैं रोड पर निकलना होता था और बस स्टॉप उसे मैं रोड में होती थी…. उसे बारे इमारत वाले बिल्डिंग के रोड्स में कोई 100 मीटर्स चलना होता था तब 100 मीटर्स तकरीबन मैं रोड पर बस स्टॉप तक जाने को. यह हर रोज़ शयाना टेयै करती थी. और सुबह सादे ना बजे भी वैसे ही बस से उतार कर 100 मीटर्स मैं रोड पर चलती और फिर 100 मीटर्स उसे बिल्डिंग वाले रोड में तब ऑफिस वाले बिल्डिंग में लिफ्ट लेती थी ऊपर अपने ऑफिस में जाने के लिए. और इन सबका विकास को कुछ पता नहीं था उसे वक्त.

तो उसे शाम को विकास को वो लड़की नहीं दिखा जिस्सको वो लूटना चाहता था. वो उसके मन में बस गयी थी और उसने उसको हासिल करने को ठान लिया था अपने मन में. उसके मन में सिर्फ़ नेगेटिव ख़यालात थे उसे लड़की को लेकर क्योंकि वो विकासा से बदला लेना चाहता था वैसा करके….. सिर्फ़ विकासा से नहीं बल्कि वो ऐसा सोचता था के सभी लड़कियाँ वैसे ही होते हे जैसे उसकी बीवी, शिरीन, कविता और बाकी वैसे मामलों से तालुकात वाले लड़कियाँ और औरतें.

तो उसे शाम को वो निराश अपने यूनिट पोनचा और अफ़ज़ल को फोन करके बताया के वो उसके फ्लैट में ही रुकें कहीं नहीं जायें….मतलब कुछ दिन के लिए विकास चाहता था के अफ़ज़ल उसके साथ रहे उसके फ्लैट में.

अफ़ज़ल का प्लान कुछ और ही था….. उसने पहले से विकासा को फोन करके एक मीटिंग फिक्स कर लिया था उसे रात के लिए. वो इंतजार में था के कब विकास काम करने जाए रात को और वो विकासा से मिलने जाए.

तो विकासा अफ़ज़ल से मिली उसे रात को एक होटल के कमरे में. ज्यादा दूर नहीं उसी शहर में ताके सुबह होने से पहले अफ़ज़ल वापस फ्लैट में जा सके विकास के लौटने से पहले.

वो पहली बार थी जब अफ़ज़ल ने विकासा को एक स्कर्ट और ब्लाउज में देखा. स्कर्ट उसकी घुटनों के ऊपर थे और ब्लाउज की दो बटन्स खुली हुई थी उसकी छाती पर. उसकी गोरी गोल गोल जांघें साफ नज़र आरहे थे और अफ़ज़ल का खड़ा हो गया उसे देखते ही. वो मुस्करा रही थी अफ़ज़ल के चेहरे में देखते हुए और जैसे वो इसी इंतजार में थी जिंदगी भर!

जैसे वह मिले होटल के कमरे में, अफ़ज़ल ने झट से उसको बाहों में लेते हुए उसके गालों को चूमना शुरू किया कसके उसको अपने छाती से दबाते हुए. अफ़ज़ल बड़ा जोश में था और यह बधबदाते हुए विकासा को अपने बाहों में उठाकर बेड की तरफ चलने लगता है

“काश मैं ने तुमको उन्न रातों को ही समझ गया होता तो कितना एंजाय करता तेरे साथ विकासा, हें किया मस्त चीज़ है तू चल मेरी जान आज चख लेता हूँ तुझे भी…. अपनी दोस्त की बीवी से इश्क करना बहुत मस्त होता है…बस समझ ले के तू अब भी विकास की पत्नी है तो मजा दुगुना हो चुदाई का किया ख्याल है तेरा?”

विकासा ने अपने जीभ से अफ़ज़ल के गालों को चाटते हुए कहा;

“हम मैं भी यही कहने वाली थी, तू यही समझ के मैं अब भी तेरे दोस्त की बीवी हूँ और तू मुझसे मिलने आया है जैसे आया करता था उन्न रातों को और चलो एक रोल प्ले करते हे वैसा ही ठीक है?”

अफ़ज़ल खुश हो गया और तैयार भी. बेड पर रखा विकासा को और कहा,

“बोल कैसे शुरू करे?”

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विकासा: “इंतजार, तू बाहर जाकर दरवाजा खटखटा, और मैं खोलने आऊंगी विकास की बीवी बनकर, और इसी ड्रेस में जिसे में तुमने कभी मुझे नहीं देखा, कैसी हूँ बहुत सेक्सी ना? तो तू बिलकुल उसी तरह फिरसे मुझसे शिरीन के मौत का घाम बाँटने आएगा और मैं तुमको इमोशनल सपोर्ट दूँगी और तू धीरे धीरे वैसा ही करना शुरू करेगा जैसे तू करना चाहता था….ओके? बाहर जाओ और नॉक करो…..”

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और रोल प्ले करके शुरू किया दोनों ने, वो विकास की बीवी बनी थी और अफ़ज़ल उसका वही दोस्त जो बगल वाले फ्लैट में रहता था… अफ़ज़ल ने दरवाजा नॉक किया और विकासा गयी खोलने और वही नशे वाले हालत में अफ़ज़ल अंदर आया और उसकी कांधों पर हाथ रख कर डगमगाते कदम से अंदर गुस्सा. पक्का आक्ट्रेस थी विकासा भी, उसने कहा,

“तुम ने इतनी क्यों पी रखे हे अफ़ज़ल, चलो बेड पर चलो तुम्हारे घाम गलत करती हूँ आज….”

और वो अफ़ज़ल को अपने बिस्तर तक लेगाई संभालते हुए उसको फिर उसको लेटाया आराम से. विकासा उसके काम में बोली, “तुम मुझे ‘भाभी” कहकर बुलाओ ज्यादा मजा आएगा”

अफ़ज़ल भी खेल में डूब गया और उसके गले में बाहों का हार डालते हुए कहा,

“भाभी आज मस्त लग रही हो इस स्कर्ट और ब्लाउज में मैं ने तो तुमको ऐसा ड्रेस में कभी नहीं देखा, ज़रा बैठो तो मेरे पास पलंग पर कुछ देखना चाहता हूँ करीब से आज…”

 

मुस्कुराते हुए विकासा बोली, “किया देखना चाहते हो अफ़ज़ल” और बैठ गयी उसे के सर के पास बेड पर जब अफ़ज़ल लेता हुआ था… उसकी स्कर्ट एक तो छोटी सी थी और बैठने से और भी ऊपर उठ गयी जिससे उसकी गोरी जांघें, वो हिस्से जो हमेशा छुपी रहती हे नज़र आया गडराए हुए, गोश्त से भरे गोल गोल जंघों जिसे पर अफ़ज़ल ने अपने हाथ रखा और विकासा के नजरों में देखते हुए कहा,

“कितनी खूबसूरत हे तुम्हारे जांघें विकासा, विकास की तो लॉटरी लग गयी है तुमको पकड़; किया मेरी किस्मत में नहीं है यह गोरी गोरी सेक्सी हॉट जांघें?”

विकासा ने उसके हाथों पर अपना हाथ रखते हुए कहा,

“मैं तुम्हारे दोस्त की बीवी हूँ तुमको इसे नहीं करना चाहिए अफ़ज़ल , भाभी हूँ तुम्हारी!!”

अफ़ज़ल: “चोदा भी भाभी, इस वक्त मैं प्यार का प्यासा हूँ और तुम्हारे पास प्यार का कुवन है मेरी प्यास को एक तुम्हीं बुझा सकती हो भाभी खुश करदो अपने इस देवर को ना!!”

फिर होना किया था विकासा ने मुस्कुराते हुए अपने सर झुका दिया अफ़ज़ल के चेहरे पर, उसके गेसू ने अफ़ज़ल का चेहरा ढँक दिया और अफ़ज़ल ने अपनी उसे भाभी की होठों को अपने होठों से गरम करते हुए उसको चुस्सने लगा और विकासा कसमसाते हुए उसको बहुत ज़ोर से अपने बाहों में भर लिया और उसके किस को जबरदस्त तरीके से रेस्पॉंड करती गयी….

अफ़ज़ल का हाथ उसके जिस्म पर चारों तरफ फेरने लगा, उसकी ब्लाउज को जोश में नॉचकर नीचे फेंका और उसकी ब्रा को सख्ती के साथ बिना अनहुक किए ही खिंच कर निकाल दिया, उसके स्ट्रॅप्स टूट गये और विकासा के दोनों बारे गोल गोल चुचियाँ अफ़ज़ल के मुँह में आ गाए…… वो सिमटने लगी उसके बाहों में और अपने सर को ऊपर के तरफ करके चाट को देखने लगी, उसकी एँखहें जैसे शराब पी रखी हे, फिर अफ़ज़ल बेड पर बैठ गया और विकासा के दोनों टाँगों को एक तरफ करते हुए उसको अपने गोद में लेकर उसकी बूब्स को चुस्सता गया…. विकासा की दोनों जांघें उसे वक्त अफ़ज़ल के पेट पर था और उसकी पैंटी भीग गयी थी जो अफ़ज़ल फील कर रहा था अपने पेट पर… फिर जल्दी से अफ़ज़ल ने विकासा को लेटाया बिस्तर पर और उसी जोश में स्कर्ट को नोंच कर ज़मीन पर फेंका और फिर सख्ती से उसकी पॅंटीस को खिंच कर उतारते हुए उसकी जांघों पर अपना जीभ फेरते हुए उसकी चुत तक पहुंचा…. विकासा कहनररते हुए बिस्तर पर रेंग रही थी जैसे उसकी जिस्म में आग लगी हो….

अफ़ज़ल उसकी चुत की पंखुरियों को अपने उंगलियों से सेपरेट करते हुए अपने जीभ से उसे रस से भीगे हुए हिस्से को आहिस्ते आहिस्ते चाटते हुए आंखों को ऊपर के तरफ उठाकर विकासा की बेताब हालत को देख रहा था….. उसको बहुत मजा अराहता विकासा को उसे हालत में देखते हुए, जैसे वो अपनी होश गंवा रही थी…. अफ़ज़ल का लंड बिलकुल एक लोहे की तरह जमकर खड़ा था और उसने अपने आंडरवेयर को जल्दी से निकाल फेंका और उसकी चुत के अंदर जीभ को दस कर गोल गोल घूमते हुए एक हाथ से अपने लंड को उसकी छाती पर रगढ़ने लगा….

विकासा एँखहें तरफ किए हुए अफ़ज़ल के लंड को हाथ में थाम कर खुद अपने चुचियों पर दबाते हुए मस्सलने लगा…… तब अफ़ज़ल ने कहा,

“भाभी मुँह में लेलो ना प्लीज़….” और विकासा ने इस तरह उसको मुँह में लेकर चुस्सने लगी जैसे मुदत से भूखी थी एक लंड को अपने मुँह में लेने के लिए…. उसे से अफ़ज़ल भी कहानरर उठा और चुत को चोर्र कर खुद अपने लंड को विकासा के मुँह में आते जाते देखने लगा मजा लेते हुए…..

बस अफ़ज़ल से रहा नहीं गया और झट से पोज़िशन में आया और अपने लंड को विकासा की गीली चुत में घुसाया और धक्का देने लगा…. विकासा चिल्ला उठी और बोलती गयी, “हाँ अफ़ज़ल हाँ हाँ और और अंदार्र्र्ररर ज्यादा अंदार्र्र्र्र्ररर घुसेड़ दो, फाड़ दो मुझे दस दो अंदर अफ़ज़ल फार्डो अपने दोस्त की बीवी की चुत को अफ़ज़ल मजा आ रही है मुझे हाँ अफ़ज़ल और ज़ोर से चोदा मुझे और अफ़ज़ल मुझे और ज्यादा चाहिएर हान हाँ हाँ!! करते जाओ करते जाओ रुकना नहीं प्लीज़ रुकना मत अफ़ज़ल…… आआआअहह ईईीीइसस्स्स्स्स्स्स्शह यईईसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स” अफ़ज़ल जोरों से धक्का देता गया उसको पेलता गया और उसके नीचे विकासा बेहाल जिस्म को रवणदते हुए और अपने मुट्ठी में चादर को पकड़ कर खिन्नचते हुए अपने दाँतों से अफ़ज़ल की छाती पर काटते हुए कसमसा रही थी….. फिर उसने अपने बाहों को अफ़ज़ल के बाहों के ताले से उसके पीठ पर करते हुए उसको इस कदर अपने छाती से लिपताया के अफ़ज़ल की सेनसें फूल गयी…..विकासा की ऑर्गॅज़म का वक्त था और वो चिल्लाई….. “आआआहह हााआअ सस्स्स्स्स्स्स्स्स्शह मजाआाआआआ आआआआआअगयययययययाअ अफ़ज़ाआाआल उूुुुउउफफफफफफफफफफफ्फ़ एसस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आआआआहह!!!!”

अफ़ज़ल रुका नहीं, उसके पसीना चुत रहे थे फिर भी जोरों से धक्का दिए जा रहा था कमर हो ज़बरदात हिलाते हुए, और उसका लंड अब आसानी से आता जाता रहा चुत में क्यों के विकासा बिलकुल भीग गयी थी ओर्स्गस्म से उसने अपनी पानी चोर्र दिया था तो अफ़ज़ल का लंड एक दम ढिल्ला सा हो गया उसकी चुत में…फिर भी अफ़ज़ल पेलता गया और खुद झार्र्ने लगा और गुर्राटे हां विकासा की मुँह को अपने मुंह में लिया फिर चुस्सते हुए :ग्ग्गन्‍न्‍नममममम ह्म्‍म्म्मम आअघघघघघघघघघघ्गगगगघह” उसने भी एजॅक्यूलेट कर दिया और लेता रहा विकासा की जिस्म पर वैसे ही कुछ देर…… दोनों खामोश थे थोड़ी देर तक…कोई कुछ नहीं बोला… अफ़ज़ल को बड़ा मजा आया और हंफ़फ रहे थे दोनों.. विकासा ने हवले से अपने उंगलियों को अफ़ज़ल के बालों में फेरते हुए कहा “चोद दिया तुमने अपने दोस्त की बीवी को आख़िर हम?”

अफ़ज़ल कुछ नहीं बोला…..और अपने नर्म लंड को उसकी चुत से निकाल ही रहा था के उसका मोबाइल बजने लगा….. अफ़ज़ल ने जल्दी से फोन उठाया, विकास ने फोन किया था इसे ही पूछने को के किया वो सो गया के नहीं….. अफ़ज़ल को एक गिल्ट जैसा फील हुआ क्योंकि उसे वक्त वो उसके एक्स बीवी के साथ था, अफ़ज़ल ने कहा;

“नहीं विकास अभी नहीं सोया हूँ तू सुना सब ठीक है उधर ना?”

विकासा ने जब सुना के विकास से बात कर रहा है तो जल्दी से अचानक अफ़ज़ल के हाथ से मोबाइल छीनना और कहा,
“हाहहहहाहा वो मेरे साथ है मुझको चोद रहा है हाहहहहाहा!

अफ़ज़ल ने बिलकुल नहीं सोचा था वो वैसा करेगी….उसका बोलती बाँध हो गया….. उधर विकास के समझ में आ गया के दोनों इस वक्त साथ हे तो चोदने के अलावा और किया कर रहे होंगे उसने कहा, “अफ़ज़ल को फोन दो!!”

हँससटे हुए विकासा ने अफ़ज़ल को फोन दिया, अफ़ज़ल का चेहरा उतरा हुआ था और समझ में नहीं आ रही था के किया जवाब देगा विकास को…. अफ़ज़ल ने कहा,

“सूणों विकास ऐसा है के…….”

विकास: “आज के बाद मेरा तेरा कोई वास्ता नहीं, तू इसी वक्त निकल जा मेरे घर से और उसको रखेल बना या जो जी में आए तू कर मगर अपना चेहरा मुझको फिर कभी मत दिखना – ई डोंट वॉंट तो सी युवर ब्लडी फेस एवर अगेन इन में लाइफ दो यू गेट में अफ़ज़ल!! यू अरे डेड फॉर में राइट नाउ!!”

अफ़ज़ल बेड से उठा विकासा को खींच कर बहुत ज़ोर से थप्पड़ मारा और निकल गया वहाँ से!! विकासा हँससटी गयी एक पागल की तरह!!

और यहाँ विकास और अफ़ज़ल की दोस्ती की भी अंत हो गयी!!

विकास का बुरा हाल था यह जानकार के उसका दोस्त भी उसकी एक्स वाइफ के साथ था और खुद को संभालना अब मुश्किल था. एक तो कोमांडो का स्ट्रेस यूनिट में ऊपर से बीवी और दोस्त दोनों के दघा….. खुद को विकास ने और भी कट्टर इंसान बना डाला इन सब हालात से गुजरने के बाद.

दिन बीए दिन वो और वाय्लेंट होता गया और खुद को एक बहुत कड़क कमॅंडो के रूप में पाया. किसी से बोलता नहीं था. बहुत खामोश रहने लगा था और उन्न कोमांडोस की तरह जो जल्लाद दिखते हे और होते भी हे वो भी वैसा होता गया थोड़े हो दिनों के बाद.

उसे लड़की को जब भी वक्त मिले ढुड़ने के लिए जा करता था उसे बारे इमारत के पास मगर कभी उसे वक्त नहीं पोुंचता वहाँ जब शयाना वहाँ से गुजरती, वो इस लिए के विकास को उसकी टाइम टेबल के बारे में नहीं पता था.

बेस्ट कोमांडोस को कॅनडा जाना पड़ा और इनटेन्स ट्रेनिंग और मॉडर्न टैक्नोलॉजी वाले एक़ूइपेमेंट्स के इस्तेमाल करने को सीखने के लिए. उन्न में बेशक विकास भी शामिल था. 4 महीनों के लिए जाना था. तो विकास अपने घरवालों से बिना मिले ही चला गया. मगर अपने बाप को फोन करके विकासा के बारे में सब कुछ बता दिया और कहा उसको शर्म आ रही है घर में मुँह दिखाने को इसी लिए घर नहीं आया. बाप से कहा के विकासा के पेरेंट्स को कुछ भी बताने की जरूरत नहीं क्योंकि उन्न से अब कोई रिश्ता नहीं रहा. हाँ घर में अपनी आंटी और बाकी के सदस्यों को बताने को बोला. विकास के बाप को उसका फिक्र होने लगा और अपनी पत्नी से इस बारे में बात करके दोनों माता अंकल आपने विकास बेटे के लिए बहुत फ़िकरमंद थे.

4 महीनों के बाद देश वापस आया तो उसको एक प्रमोशन जैसा कुछ इसे फेसिलिटीस और हक़ दिए गये जो सिर्फ़ 7 कोमांडोस को मिले. उन्न 7 कोमांडोस के लिए एक स्पेशल मीटिंग किया गया और उन्ँसे चीफ्स ने ये कहा;

“आस फ्रॉम नाउ यू गाइस विल भी 24 अवर्स पर दे ऑन ड्यूटी ईवन वेन यू अरे इन युवर होम. अन्य टाइम वेन यू फील अन्य काइंड ऑफ आक्षन्स शुड भी टेकन फॉर थे बेटरमेंट ऑफ सोसाइटी और थे कंट्री यू कॅन ताकि आक्षन्स वितऊथ कनसल्टिंग अन्य सुपीरियर्स और देन रिपोर्ट थे मॅटर लेटर. तीस मीन्स डेठ वेनेवर यू सी अन्य गॅंग्स्टर, एनिबडी डूयिंग इल्लीगल आक्षन्स यू हॅव थे राइट तो किक, बीत ओर किल इफ़ नींद भी वितऊथ और परमिशन्स! थे यूनिट हंस फुल फेत इन यू डेठ यू विल दो जस्टीस तो थे ईज़ और फेसिलिटीस गिवन तो यू. प्लीज़ तीस शुड भी नोटेड डेठ यू विल एक्ट ओन्ली फॉर थे हेल्प ऑफ पीपल इन डिसट्रेस और विल नोट और नेवेर उसे दीज़ फसिलतीएस फॉर युवर पर्सनल गईं. हवेवर इफ़ इट विल एवर भी डिसकवर्ड डेठ यू दीदी एनितिंग फॉर युवर पर्सनल बेनेफिट वेरी स्ट्रिक्ट और सीरीयस आक्षन्स विल भी टेकन अगेन्स्ट यू बीच में लिड यू तो इंप्रिसोणेमेंट और डिसमिसल फ्रॉम थे यूनिट. यू अरे ऑल गिवन स्पेशल एक्विपमेंट्स तो भी यूज़्ड 24 अवर्स बीच विल ऑल्वेज़ भी इन युवर पोज़ेशन आइदर यू भी हियर ओर अट होम. यू अरे ऑल्सो आलाउड तो उसे थे कार साइरन बीच विल भी प्लेस्ड ऑन युवर वेहिकल इफ़ एवर यू अरे फॉलोयिंग आ गॅंग्स्टर ओर गोयिंग तो दो अन्य अफीशियल जॉब वेन थे ट्रैफिक इस डेन्स, सो डेठ यू गेट वे इन थे रोड.”

वो कार साइरन वही जिससे लाल बत्ती कहते हे जो पुलिस की गाड़ियों में या मिनिस्टर्स के गाड़ी में होते हे वो विकास को मिला. मगर कोमांडोस की जलने वाले बत्ती लाल नहीं बल्कि नीला रंग का था. और उसको हूँ अपने कार के अंदर रख सकता था और जरूरत पड़ने पर कार के ऊपर लगा कर ड्राइव कर सकता था.

उन्न चार महीनों में वो उसे लड़की का चेहरा नहीं भूला था. और उसको फिरसे तलाश करने के लिए उसे बिल्डिंग के पास गया. अब उसको सिर्फ़ रात को नहीं काम करना….. वो जब चाहे और जिसे वक्त चाहे यूनिट में रिपोर्ट कर सकता था, वो घर पे हो या कहीं भी हो 24 अवर्स ड्यूटी पर ही होता था…. तो इस लिए अब उसको आसानी हो गयी उसे लड़की को ढूंढ़ने में….. कई सुबह को भी विकास गया वहाँ देखने के लड़की उन्न बिल्डिंग्स के किसी एक भी बिल्डिंग में अगर काम करती होगी तो सुबह को तो जरूर आएगी उधर…..

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