Darinde Se Mohabbat- 20

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एकात दिन वॉच करने के बाद एक दिन उसको शयाना दिख गयी सुबह को पैदल चलते वक्त…. वो बस से उतार के 100 मीटर्स मैं रोड में चल कर अब बिल्डिंग्स वाले रोड पर चली जा रही थी अपने ऑफिस के तरफ. विकास का चेहरा बहुत कड़क दिख रहा था जैसे बहुत घुस्से में हो….. बहुत सख्त जान दिख रहा था वो… और शयाना, बिलकुल नाज़ुक, कोमल सर झुकाए चली जा रही थी. विकास ने खूब अब्ज़र्व किया उसको, ऊपर से नीचे तक उसको खूब देखा और फॉलो किया के किस बिल्डिंग में जाएगी वो….. विकासा जब बिल्डिंग के लिफ्ट में चली गयी तो विकास वापस चला गया.

और प्लान बनाने की तैयारियां में लग गया……. उसकी प्लॅनिंग उसके दिमाग में बन था. वही जाने के किया सोच रहा था और कब एक्ट करेगा.

फिर वो अपनी कार ड्राइव करता गया बहुत ही दूर एक गाँव से गुजर कर खेतों के तारफ़ बढ़ने लगा और एक गन्ने के खेती के पास रुका शहर से मीलों दूर. कार से उतार के इधर उधर कुछ तलाश किया तो एक किसान उधर से गुजर रहा था जिस्सको विकास ने रोक कर पूछा;

“यह गन्ने का खेत क़िस्सका है?”

किसान: “ई साहिब , ई तो यू सुखिया के बातें साहेब कोनों काम बीए का ओकर से तोहरा?”
विकास: “मैं उसे सुखिया से मिल सकता हूँ किया? कहाँ रहता है वो मुझको उसके पास लेजा सकते हो तुम?”

किसान: “हाँ मालिक कहे नाहीं हो! चला हम तोहरा ओकर घर बतला देब आवा हमार संगे!!”

विकास उसे किस्सन के पीछे पीछे गया और एक चोथी से झोमपरी में गया जहाँ सुखिया रहता था.

किसान: “अरे ओ सुखिया देख तोहार से ईगो साहिब बाबू अवाल बीए मिलने को कोनों काम बातें शायद आकर मिल ले एकड़ से तू!!”

सुखिया जब बाहर आया तो विकास को देख कर अपना सर खुजाते हुए बोला,

“कोन काम बीए माअलिक? कोन हवा तू हो?”

विकास: “वो उधर कोई 4 या पाँच बीघा गन्ने के खेत वाला ज़मीन है वो तेरा है?”

सुखिया: “हाँ साहिब यू हमार पूर्वजों के निसानी बॅया हमाअर उही से पेट के खातिर रोती मिलत बीए हुँका!”

विकास: “ हम मुझे उसे खेत के बीच में एक बड़ा गद्दा खोदकर एक कमरा जैसा बनाना है मैं कोमांडो हूँ और इस बात का पता किसी को भी गाँव में पता नहीं होना चाहिए….. यह सरकारी काम है इसके लिए तुमको 10 हज़ार रुपया देता हूँ और काम खत्म होने के बाद और 10 हज़ार मिलेगा…. उसके बाद गद्दे को भर देना और अपने गन्ने को दोबारा रोप लेना मंजूर है तुम्हें?”

10 हज़ार सुनकर सुखिया के मुँह में पानी आ गया और तुरंत हाँ बोला मगर सवाल किया;

“ठीक बीए मालिक पर कोन ऐसन काम बॅया की ज़मीन के नीचे कमरा जैसन बनैयबा? अवर् ओक्रा फिर से भर देबू?”
विकास ने उसे बताया के एक ख़ुफ़िया काम है उधर डाकू और टेररिस्ट के आदमी बाहर मुल्क से आए हत्यारों का धंधा करते हे इस लिए उसे जगह से वो सब पर निगरानी रखेगा अपने सेटिलाइट वॉच से….. बेशक विकास ने सब झूठ बोला उसको, थग दिया सुखिया को.

सुखिया ने 10 हज़ार रुपये ले लिए और विकास को अपने खेत के अंदर जाने दिया और वादा किया के वो बात किसी को भी नहीं बताएगा.

गन्ने के खेत के अंदर अगर कोई सिर्फ़ 5 मीटर्स अंदर छुपेगा तो बाहर रास्ते पर वो किसी को नहीं दीखेगा. गन्ने के ऊँचे ऊँचे स्टिम्स और पत्तियाँ समेट इतने झाड़ करते हे और उसके सूखे पत्तों के बीच च्छूपने में बहुत आसानी होती है. अब अगर कोई 500/1000 मीटर्स अंदर होगा उसे खेत के बीच तो नामुमकिन है के कोई देख सके.

विकास ने वही किया. पहले तो अंदर घुस्सता गया घुस्सता गया इतना पैदल अंदर चलता गया के उसके पांव में दर्द हो गये….. 1 किलोमीटर्स से ज्यादा अंदर गया खेत के बीच में. अब उन्न पट्टियों के बीच झुकी कर चलना पड़ा उसको क्योंकि अगर सीधा खड़ा होकर चलता तो उन्न हारे पत्तों से चेहरा कट जाता है खून निकल आता है, वैसे ही उसके बाज़ुओं में बहुत सारे खराच आ गये…. उसने उसे जगह का मोआएना किया और एक जगह स्पॉट किया…..

वापस शहर जाकर समान खरीदा जिससे ज़मीन खोद सके और गॅनन को काट सके…. हुए, स्पेड्स वाघहैरा खरीद कर वापस खेत के अंदर गया. सुखिया उसको अच्छी तरह से बहुत ध्यान से देख रहा उसका आना जाना और खेत के अंदर घुस्सना निकलना.

उसे रोज़ देर शाम को जब सूरज ढालने वाला था तब विकास खेत से बाहर निकला और बुरा हाल था पसीना पसीना हो गया था और थकान तो इसे थी के लगता था अब बेहोश गिरर पड़ेगा. उसकी गाड़ी सुखिया के कहने पर एक ख़ुफ़िया जगह पर च्छुपाया गया था जहाँ कोई आता जाता नहीं था. उसके बाहर आने पर सुखिया उसका इंतजार कर रहा था पानी और साबुन वाघहैरा के साथ नहाने के लिए क्योंकि विकास ने उसको कहा था वैसा करने को. मिट्टी से कपड़े और हाथ पयर सब बहुत मेले हो गये थे जैसे किडचार से निकल कर आ रही है….. उसके हाथों में छाले पड़ गये थे, सुखिया ने पानी देते वक्त कहा;

“बाबुवा, लागत बीए के तोहरा ऐसन काम करके के आदत नहीं बीए…. बोला था हम अपने साथी लोग से तोहरा मदद के लिए भेजुन का?”

विकास ने उसको घुस्से से देखते हुए कहा,

“तुम समझते नहीं हो क्या के किसी को भी कुछ पता नहीं चलना चाहिए? किया कहा था मैं ने तुमसे के यह एक बहुत ख़ुफ़िया काम है? एक भी आदमी को नहीं पता चलना चाहिए इस बारे में समझे तुम के नहीं? अगर तुम्हारे साथी लोग आकर मेरा मदद करेंगे तो उन्न सब को पता नहीं चल जाएगा के तुम्हारे खेत के अंदर किया हो रहा है और बात फेयल नहीं जाएगी उन्न लोगों के जरिये?”

सुखिया: “माफी दएदो हुजूर हमसे गलती भय गल, अब हम कोनों को नाहीं बतलाब ई बात को”

दूसरे दिन सुबह सवेरे विकास आ गया खेत के अंदर. यह सब जो वो कर रहा था उसके कोमांडो की ट्रेनिंग में कर चुका था…गद्दा खोदना, ज़मीन के नीचे ज़िंदा रहना यह सब सीख चुका था वो इसी लिए उसको सब करने में ज्यादा कठिनाई नहीं हो रही थी बस बहुत थकान हो रहा था अकेले सब करने में. उसे खेत के बीच में उसे ने 10 बायें 10 ज़मीन को एक स्क्वेर बनाया और उठने गॅनन को काट दिया और उंटने ज़मीन को खोदना शुरू कर दिया…. तीन दिन के अंदर आधा गहराई खोद दिया और तकरीबन 5 फीट नीचे तक खोद दिया था. चाहता था कम से कम 8 फीट की गहराई खोदे इस लिए पूरे 7 दिन हर रोज़ आकर खोदा ज़मीन को…..

जब 10 बायें 10 चारों तरफ खोद दिया बिलकुल एक कमरा जितना लगने लगा तब बाहर जाकर लकड़ी काटा, लकड़ी जैसे दरखत काट कर अपने कंधे पर पहाड़ चहधता था और उतरता था वैसे बारे बारे पेयरों को कुलहारी से काट कर अपने काँधे पर एक एक करके खेत के अंदर लेगया. कोई 20 बार आया और गया बारे और मोटे लकड़ियों को अपने काँधे पर लेकर. और उन्न से चाट बनाया गद्दे के ऊपर. लकड़ियों को गद्दे के ऊपर इस तरह लगाया बिलकुल जैसे एक मकान की छत्त को बनाया जाता है, फिर उन्न लकड़ियों के ऊपर गन्ने के सूखे पत्तों को किसी तरह चाह दिया के बिलकुल नहीं लगे के वहाँ नीचे एक गद्दा है 10 बायें 10 का!!

उसे रोज़ जब लकड़ी लेजा रहा था एक एक करके तो एक बार सुखिया उसके पीछे पीछे गया गद्दे तक. उसे ने उसकी मदद किए चाट पर पत्तों से छत्त बनाने को क्योंकि सुखिया को आता था बनाना और उसके झोमपरी पर वैसे ही गन्ने के सूखे पत्तों का ही चाट था.

फिर विकास ने एक सीधी बनाया नीचे उतर्र्ने के लिए, और अंदर भी बहुत सारे सूखे पत्ते डाले नीचे ज़म्में पर गद्दे के अंदर. अंधेरा लग रहा था अंदर तब. उसने अब सोकचा के चिराग की जरूरत पड़ेगी. तो उसे शाम को वापस घर गया तो घर में से एलेक्ट्रिक चार्जबल टॉर्च वाघहैरा रखा समान में अपने.

और दूसरे दिन शॉपिंग भी किया बहुत सारे समान के जो इस्तेमाल करेगा उसे अंडरग्राउंड जगह पर. और बैटरी से जलने वाली चिराग भी खरीदा कोई 4 या 5 तक. और सभी जरूरत के सामान भी खरीदा. खाने पीने का समान भी लिया. लगता था एक नये घर में शिफ्ट होने वाला है इतना समान खरीद रहा था.

खेत में सब कुछ तैयार कर दिया और नीचे अंडरग्राउंड ज़मीन पर मोटा सा कालीन बिछा दिया. बहुत ठंड था ज़मीन के नीचे…… बाहर से किसी को कुछ भी नहीं दिकखते थे मगर एक हेलिकॉप्टर अगर ऊपर से गुज़रेगा तो साफ दिखाई देगा के गन्ने के खेत के बीच में एक स्क्वेर 10 बायें 10 किया गया है….. मगर यह नहीं दीखेगा के वहाँ गद्दा है और उसके नीचे कुछ है.
और विकास ने एक हफ्ता और इंतजार किया अपने ज़ख़्मों को भरने के लिए, हाथ में छ्चाले, बाज़ुओं पर खराचें वाघहैरा, सब भरने दिया तब तक वापस उसे लड़की की टाइम टेबल पर नजरें रखने गया उन्न दिनों.

सुबह को कई रोज़ सोनिया को काम पर आते देखा उसे ने. मगर शाम को जब भी जाता इंतजार करने तो वो नहीं दिखती थी. वो इस लिए के विकास को रिलीस टाइम का पता नहीं था. फिर एक सुबह को जब सोनिया अंदर लिफ्ट में चली गयी तो विकास एक सेक्यूरिटी गार्ड से सवाल करने गया. उसने पूछा के इस बिल्डिंग के काम करने वाले शाम को कितने बजे काम खत्म करते हे.

सेक्यूरिटी गार्ड ने विकास पर रोब जमाते हुए बोला;

“आप क्यों जानना चाहते हो? स्ट्रेंजर्स को इस बिल्डिंग के ऑफिसर्स के बारे में कुछ भी जाने की जरूरत नहीं है.”

विकास ने अपने रिवाल्वर निकालके उसे से कहा,

“अभी मैं ने तुझे बताया ना के मैं कौन हूँ तो मूठ देगा अपने पेंट में, साला बता मुझसे वरना एक गोली तेरे भेजे के अंदर घुसेड़ता हूँ!”

गार्ड ने सोचा के यह कोई भाई, दादा वाघहैरा है तो थरथराते जुबान से कहा,

“अरे भाई पिस्तौल को दूर करो, हम बीवी बच्चे वाले हे…. शाम 4 से 4.30 को सब चले जाते हे साहब पिस्तौल हटाओ डर लगता है!”
विकास ने हल्की सी मुस्कान में कहा,

“हाँ अब आया ना लाइन पे तू? शुक्रिया और खबरदार मेरे बारे में किसी से कुछ कहा तो उड़ा दूँगा समझा?”

गार्ड पागल था जो किसी से कुछ कहता; सच में उसको मूतने का मन किया और जल्दी से टॉयलेट गया…..

और उसे शाम को विकास शयाना की हर हरकत को नोट किया, कितने बजे निकलती है, कितने टाइम में रास्ते पर आती है, फिर कितने मिनट में बस स्टॉप तक पोुंचती है और कितने बजे बस में जाती है….. ऐसा तीन रोज़ शाम और सुबह को विकास ने वॉच किया सोनिया को…. वो सब कुछ परफेक्ट करना चाहता था… नहीं चाहता था के जिसे रोज़ काम शुरू करे कोई गड़बड़ हो…. सब टाइमिंग के हिसाब से कर रहा था आख़िर कोमांडो की ट्रेनिंग कब काम आता उसको!!

और आख़िर वो दिन आया!!

एक सुबह को सोनिया सर झुकाए बस से निकली और बस स्टॉप से होकर अब ऑफिस वाले बिल्डिंग के तरफ चल रही थी के अचानक एक कार रुकी ठीक उसके बगल में और एक आदमी जिसके चेहरे पर रूमाल का नकाब बँधा हुआ था उसके हाथ को अचानक पकड़ा……

एक सुबह को सोनिया सर झुकाए बस से निकली और बस स्टॉप से होकर अब ऑफिस वाले बिल्डिंग के तरफ चल रही थी के अचानक एक कार रुकी ठीक उसके बगल में और एक आदमी जिसके चेहरे पर रूमाल का नकाब बँधा हुआ था उसके हाथ को अचानक पकड़ा……

विकास ने सब कुछ ठीक से देख कर वैसा किया, अच्छी तरह से देख लिया के दूर दूर तक कोई आगुए पीछे नहीं है, तब सोनिया का हाथ पकड़ा, सोनिया छोहुनक गयी और हाथ खींचने की कोशिश की मगर विकास की मज़बूत हाथ से निकलना आसान नहीं था कोमल सोनिया को…… सोनिया डरी हुई बोली, “कौन हो तुम चोररो मुझे वरना मैं चिल्लौंगी….” विकास ने उसको ज़ोर से खींचा और सोनिया चिल्लाई….. जैसे च्िल्लाई विकास ने एक ऐसा थप्पड़ मारा उसकी कँपत्ति पर के सोनिया के भेजे में एक ऐसा गूँझ उठा जैसे कोई बॉम्ब फटा हो…. और उसको चक्कर आने लगी और गिररने वाली थी तब विकास ने उसको उठाकर कार के सामने वाले सीट पर बिठाया और जल्दी से ड्राइविंग सीट पर बैठा और गाड़ी स्टार्ट किए. एक आदमी जो दूसरे बिल्डिंग के ऑफिस वर्कर था तब तक करीब आ गया था और विकास को रोकते हुए कहा, “किया बात है भाई क्यों लड़की हो ज़बरदस्ती ले जा रहे हो?” विकास ने कहा, “माइंड युवर ओन बिज़्नेस शी इस में वाइफ और अभी हॅव गॉट आ पर्सनल प्राब्लम!!” तो आदमी ने कहा, “ओह! सॉरी देन”

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विकास ने अपने कार की नंबर प्लेट बदल दिया था एक नकली नंबर से. और कार स्टार्ट करके जल्दी से वहाँ से निकल पड़े. सोनिया अपने सर को दोनों हाथों में दबाए “आआहह” कर रही थी….. वो बेहोश हो गयी थी उसे थप्पड़ से. वो नाज़ुक सोनिया जिस्सको कभी किसी ने छुआ तक नहीं वो इतनी नाज़ुक थी के काँटा भी उसको च्छूबने से दर्रती , वैसे सोनिया को एक ऐसा थप्पड़ लगा जो शायद ही किसी को लगा हो कभी… विकास का ट्रेंड हाथ, इतना मज़बूत था के बारे से बारे मर्द को भी अगर एक लगता तो दूसरा नहीं माँगता कभी, और हाल में गद्दे खुड़ने से , छाले पड़ने से विकास का हाथ और भी सख्त हो गया था ऊपर से ट्रेंड था के कैसे मारना चाहिए के किसी को ऐसा लगे के होश उड़ जाए….

सोनिया के आंटी बाप ने उसे पर कभी भी हाथ नहीं उठाया था. बारे नाज़ों से पाली थी वो. सोनिया को पता नहीं था एक थप्पड़ किया होती है.. उसका सर दर्द करने लगा और धीरे से एँखहें खोल के कार से बाहर देखते हुए अपने नाज़ुक आवाज़ में पूछी, “हम कहाँ जा रहे हे कौन हो तुम? क्यों मुझको मारा तुमने? मैं ने किया किया?”

उसकी आवाज़ में इतनी कोमलता थी के विकास काफी हेराँ हुआ और मगर उसको कोई जवाब नहीं दिया और ड्राइव करता गया सेंट्रल लॉक का स्तनों दबा कर. विकास के सर पर एक टोपी था…. अस्सल में वो टोपी नहीं बल्कि कोमांडो वाला नकाब था जो वो सर से खींचे तो चेहरे पर आ जाता था और तीन छेद होती है उसमें, दो आंखों के लिए और एक मुँह की जगह पर….. तब तक रूमाल बँधा हुआ था उसके चेहरे पर नाक से लेकर नीचे तक…..

सोनिया को समझ में नहीं आ रही था के किया हो रहा है, उसको अब तक चक्कर आ रही था, उसको लगता था के ज़मीन घूम रही है, और कभी दिन तो कभी रात लग रही थी…. उसको लगता था एक ख्वाब में है…यकीन नहीं आ रही था उसको के किसी ने उसको अगवा किया अभी अभी…. काफी देर तक वो उसी हालत में रही और अपने आंखों को बंद कर लिया खुद को बीमार जैसे महसूस कर रही थी…..

कोई 50 किलोमीटर्स ड्राइव के बाद विकास ने कार रोका और देखा के सोनिया शायद नींद में है, उसको जगाने की कोशिश किया और सोनिया नहीं जागी तो उसकी साँसों को चेक किया और उसके दिल की धड़कनों को सुना अपने कान को उसकी सीने पर लगाकर….. उसे वक्त सोनिया की कोमल बूब्स विकास के गाल और कान से लगा….. कितनी कोमल थी, नाज़ुक थी, लगता था एक ऐसा फूल है है जिस्सको अगर हाथ लगाया तो बिखर जाएगी, टूट जाएगी. लूट जाएगी….. मगर विकास को ऐसा कुछ नहीं महसूस हो रहा था उसका लक्ष्य कुछ और ही था उसे वक्त….. तो उसने कार को बाहर से लॉक करके नंबर प्लेट बदला बीच रास्ते में और असली नंबर वापस लगा दिया और फिर ड्राइव करते चला गया…..

कोई और 15 मिनट के ड्राइव के बाद सोनिया को फिर होश आया और कहानर्ते हुए पानी की माँग की….. विकास ने कहा “पानी नहीं है मेरे पास….” तो सोनिया ने कहा, “मेरे बैग में है, कहाँ है मेरा बैग?” तो विकास ने इस बार अपने सर वाला नक़ाब खींच लिया अपने चेहरे पर तब पीछे मूधकर बेक सीट पर देखा जहाँ उसने सोनिया की बैग फेंका था…. और ड्राइव करते हुए एक हाथ से बैग को खींच कर सोनिया के गोद में रख दिया….. सोनिया ने मिनरल वॉटर की बोतल से पानी पिया और पूछा, “तुम पियोगे? तुमको प्यास लगी होगी!” विकास ने बस उसको घुस्से भरे नजरों से देखा पर जवाब नहीं दिया…..

कुछ देर बाद सोनिया ठीक होने लगी और होश संभालने पर विकास के चेहरे पर देखते हुए पूछा, “कहाँ ले जा रहे हो मुझे तुम हो कौन? अपना चेहरा क्यों छुपाया है?”

विकास ने उसको मोटे मोटे आंखों से देखते हुए ज़ोर से कहा “जस्ट चुत उप और सीट क्वाइयेट्ली वेर यू अरे! डोंट अस्क में अन्य क्वेस्चन!” और सोनिया चुप हो गयी थोड़ी देर के लिए….. वो सोचने लगी के ऑफिस में लोग उसके बारे में सोचेंगे और सवाल करेंगे के क्यों अभी तक नहीं पोंहुचि तो अब कहा;

“मुझे ऑफिस के लिए लेट हो रही है मुझको वापस चॉर्र्डो प्लीज़….”

विकास : “आज ऑफिस नहीं जा रही हो तुम!”

सोनिया: “क्यों?”

विकास: “क्यों के मैं कह रहा हूँ”

सोनिया: “तुम कौन?”

विकास : “चुत उप”

सोनिया: “यह भी कोई नाम है भला?”……. अचाह मिस्टर चुत उप, तुमने नक़ाब क्यों पहना है?”

विकास ने घुस्से में कहा; “तुम भोली बनने का नाटक कर रही हो या दिमाग से पैदल हो?”

सोनिया: “पता नहीं!”

और सोनिया इधर उधर देख रही थी के शहर से बहुत दूर निकल गये हे और सिर्फ़ हरियाली दिख रहे हे और दूर में एक गाँव जैसा…. फिर पूछा….

“तुम इधर क्यों जा रहे हो? और बताओ मुझे इतने ज़ोर से थप्पड़ क्यों मारा था तुमने? मैं ने तो कभी किसी का कुछ नहीं बिगरा और आज तक मेरे आंटी बाप ने भी मुझे थप्पड़ नहीं मारे, फिर तुम्हारा हाथ है या हथौड़ा? मैं बेहोश ही हो गयी और अब भी चाह कर सा आ रही है, सर में दर्द हो रहा है…. क्यों मारा मुझे तुमने? और बताओ ना हम जा कहाँ रहे हे?”

विकास ने कोई जवाब नहीं दिया तो सोनिया ने कुछ सोचते हुए कहा;

“अचाह अब मैं समझी यह कोई टीवी गेम शो है किया? मुझको बकरा बना रहे हो क्या? कमरा कहाँ है? पीछे कोई कार कमरा के साथ हम को फॉलो कर रहा है किया?” और वो पीछे मूंड़ कर देखने लगी….. तो विकास ने फिरसे हाथ उठाया जैसे उसको एक और थप्पड़ मारने जा रहा हो… तो सोनिया अपने दोनों हाथों को अपने सर पर करते हुए बिलकुल झुक गयी और इंतजार कर रही थी के अब थप्पड़ पड़ेगा उसे पर… और कुछ पल इंतजार करती रही और धीरे धीरे सर को ऊपर उठाकर देखने की कोशिश किया के विकास का हाथ किधर है…. मगर वो तो ड्राइव कर रहा था ……… तब सोनिया ने अपने बैग से अपना मोबाइल निकाला और नंबर डायल करने लगी……

विकास ने एक बार देखा, फिर रास्ता देखा फिर से सोनिया के हाथ में मोबाइल देखा, फिर से रास्ता देखा फिर सोनिया को देखा के वो नंबर डायल कर रही है तो झट से मोबाइल पर इतना ज़ोर से मारा के थोड़ा सोनिया को लगा थोड़ा मोबाइल पर और मोबाइल नीचे गिर गया और कवर बैटरी सिम सब अलग अलग हो गये…. सोनिया ने अपने उसे हाथ को दूसरे हाथ में लेकर इस बार रोने लगी यह कहते, “तुम्हारे हाथों से इतना चोथ क्यों लगता है, हाथ से मारा या लकड़ी से?!! तुम आदमी हो या जानवर? मुझे ऑफिस फोन करके बताना है के मैं काम पर नहीं आ रही हूँ वरना वो लोग घर फोन करके पूछेंगे के कहीं मैं बीमार तो नहीं?!!” और वो सर झुका कर अपने चेहरे को हाथ में लेकर रोने लगी…..

अब विकास ने सोचा अगर ऑफिस वालों ने उसके घर फोन कर दिया तो मुश्किल हो जाएगा सबको पता चल जाएगा के वो ऑफिस में नहीं और उसको ढुड़ने लगेंगे… तो जल्दी से विकास ने अपना मोबाइल दिया उसको और आर्डर देते हुए कहा “यह लो कर लो फोन ऑफिस को और खबरदार किसी से कुछ कहा तो….सिर्फ़ इतना कहना के ऑफिस नहीं आ रही हो कोई वजह मत बताना…..”

सोनिया ने फोन लिया और हाथ में फोन लेते ही कहा,

“नंबर नहीं मालूम!!”
विकास: “वॉट? वॉट थे हेल अपने ऑफिस का नंबर नहीं मालूम?”

सोनिया सर नीचे करते हुए और एनसू पोंछते हुए धीरे से कहा, “नंबर मेरे मोबाइल में है तो वो याद रखता है ना तो मुझे याद रखने की किया जरूरत है? उसकी मेमोरी ज्यादा चलता है मेरे वाली से!!”

विकास को बहुत गुस्सा आराहा था और उसने कार फिरसे रोका एक गाँव के पास और कार में सोनिया की मोबाइल के पुर्ज़े ढूंढकर सब ठीक किया और सोनिया ने ऑफिस फोन करके बताया के वो नहीं अरहै है क्योंकि वो एक टीवी शो में हिस्सा ले रही है….”

विकास को अजीब लगा के उसने वैसा क्यों कहा…… और फिर कार बढ़ने लगी उसे गन्ने की खेत के तरफ…. दिन के 11 बजने वाले थे…

खेत के पास आकर विकास कार को एक कोने में पार्क करता है झाड़ियों के बीच जहाँ किसी का नज़र नहीं पड़ेगा. मगर उसे वक्त खेत के आस पास कुछ लोग आ जा रहे थे, तो विकास को कार में कुछ देर बैठना पड़ा उन्न लोगों को जाने का टाइम देने के लिए. उसे दावरान सोनिया ने बाअट किए विकास से;

“यह कौन सी जगह है? कितनी हरियाली है, मुझको बेहद पसंद है यह जगह. तुम्हारा खेत है किया इधर? जानते हो तुम, मेरा बचपन इसे ही जगह पर बीती है और बहुत याद आती है उन्न दिनों की. तुम भी इसे गाँव में बारे हुए हो क्या तुम्मको भी पसंद है इसे जगह?”

विकास उसकी बातों से तंग आ गया था और उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था उसे वक्त तो घुस्से में कहा,

“विल यू प्लीज़ चुत उप! अपना मुँह बाँध रखो वरना एक और झांपाद लगाउँगा!”

सोनिया चुप हो गयी और विकास की नजरों को फॉलो करके वो भी देखने लगी के विकास किया देख रहा है…. तो देखा के तीन औरतें सर पर बॉडी लिए उसी खेत के पास से गुजर रहे थे जहाँ विकास को जाना था. और सोनिया फिर बोली मुस्कुराते हुए;

“वो औरतें कैसे सर पर बॉडी बिना हाथ से पकड़े इतनी जल्दी चल रहे हे? कैसे संभालते हे उन्न बॉडियों को सर पर वह लोग? मैं कुछ फोटोस लेती हो मोबाइल से ओके?”

जैसे ही सोनिया ने मोबाइल से फोटो लेनी चाही विकास ने झट से उसके हाथ से मोबाइल छिन लिया और कहा,

“तुम अपने मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करोगी, यह मेरे पास रहेगा अब.”

सोनिया ने उसको तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, “जल्लाद हो तुम मैं तुमसे बात नहीं करती अब!”

जल्लाद लव्ज़ सुनकर विकास को ट्रेनर्स के याद आए और अपने दोस्तों के मुँह से जलाद वर्ड याद आया और एक पल में उसके दिमाग में हें कभी ट्रेनिंग के कठिन दृष्ट नज़र आ गाए….

तब तक वह औरतें लोग उसे खेत के आस पास से गुजर चुके थे… विकास कार से उतरा और बाहर से सेंट्रल लॉक लगा के थोड़ा दूर चल कर मोआएना किया फिर वापस आया और कार खोल के सोनिया के हाथ पकड़ कर उसको बाहर निकालने को कहा, वो बिना झीजक निकल गयी और विकास उसका हाथ पकड़े चल रहा था…. कोई 10 मीटर्स तक चले तो सोनिया ने कहा,

“मेरी बैग!! मेरी बैग अंदर रहगाई मुझे वो लेना है”

विकास फिर उसको वैसे ही पकड़े कार के पास वापस गया और उसकी बैग निकल के दिया उसको जिस्सको सोनिया ने अपने काँधे पर टंगा और फिर विकास सोनिया को खिन्नचते हुए ले जाने लगा खेत के तरफ. चलते वक्त सोनिया ने देखा के विकास के कमर में एक रिवाल्वर और बड़ा सा चाकू लटके हुए हे तो उसको थोड़ा सा खौफ हुआ, फिर भी अपने आप को संभालते हुए आराम से पूछा,

“तुम्हारे पास हत्यार क्यों हे? इंतजार मुझे सोचने दो, एक तो तुम्हारे चेहरे पर नक़ाब, उसे पर तुम सख्त जलाद, और यह रिवाल्वर और चाकू…. तुम किया डाकू हो? मॉडर्न डाकू हिहिहिहीही जो घोड़े के प्लेस में कार ड्राइव करता है हहेहहे”

विकास उसको खींचते हुए दो कदम आगे चल रहा था और सोनिया पीछे थी तो विकास और ज्यादा घुस्से में उसको मूंड़ कर देखते हुए कहा,

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